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सुनील गवास्कर – भारतीय बल्लेबाजी के गॉडफादर

“The Godfather of Indian batsmanship”

सुनील गावस्कर को “Godfather of Indian batsmanship” कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. जिस दौर में भारतीय बल्लेबाजों को तेज गेंदबाजी के सामने कमजोर माना जाता था उस समय भारतीय क्रिकेट के पटल पर उदय हुआ सुनील गावस्कर का. पाँच फुट पाँच इंच कद वाला ये खिलाड़ी ठोस तकनीक और मजबूत इच्छाशक्ति का धनी था..

1971… भारत का वेस्ट इंडीज़ दौरा… पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट… ये सीरीज का दूसरा टेस्ट था, इसमें गावस्कर का डेब्यू हुआ, पहली बारी में 65 और दूसरी में मैच विनिंग 67 नाबाद… भारत ने ये मैच 7 विकेट से जीता, वेस्ट इंडीज़ पर यह हमारी पहली विजय थी, अगले तीन टेस्ट मैचों में सुनील गावस्कर ने तीन शतक और एक दोहरा शतक बनाया और भारतीय टीम 1-0 से सीरीज जीत गई… 4 मैचों में 154 की औसत से 774 रन बनाकर सुनील गावस्कर ने अपने लक्षण दिखा दिए थे.

1975-76 में भारतीय टीम एक बार फिर से वेस्ट इंडीज़ में थी. मैदान वही पोर्ट ऑफ स्पेन का, जहां गावस्कर का डेब्यू हुआ था. चौथी पारी में 403 रनों के लक्ष्य… सुनील गावस्कर ओपन करने उतरे… 103 रनों की पारी खेली.. इसके बाद गुंडप्पा विश्वनाथ के 112 की बदौलत भारत ने असंभव लक्ष्य प्राप्त कर लिया.

1979 में दूसरे क्रिकेट विश्वकप में अपने सारे मैच हारने के बाद भारतीय टीम एक बार पुनः इंग्लैंड में थी… पहला टेस्ट हार चुकी थी, दूसरा ड्रॉ हो चुका था, तीसरे में जीतकर सीरीज ड्रॉ करने की आशा जीवित थी. लंदन में ओवल का मैदान… चौथी पारी में 438 रनों के लक्ष्य….. ये लक्ष्य ऐसा था जिसके सामने 2018 में भी टीमें ड्रॉ के लिए खेलने का प्रयास करेंगी.. लेकिन भारतीय टीम ने चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक बिना विकेट के 76 रन बना लिए थे, अंतिम दिन 362 रनों की आवश्यकता.. सुनील गावस्कर ने अविश्वसनीय बल्लेबाजी की… भोजनावकाश से पूर्व गावस्कर और चेतन चौहान ने 93 रन और जोड़े, स्कोर 169/0… दूसरे सत्र में ड्रिंक ब्रेक तक 213/0 … अभी तक मैच ड्रॉ होता ही दिखाई दे रहा था. अगले एक घंटे में गावस्कर ने गियर बदला और स्कोर 304/1 .. ओवल में उपस्थित दर्शकों को अब यह लक्ष्य संभव लगने लगा था.. अंतिम सत्र में 134 रनों की आवश्यकता, 9 विकेट शेष… अंग्रेज कप्तान माइकल ब्रेरली ने ओवररेट धीमी कर दी. गावस्कर का दोहरा शतक पूरा हो चुका था.. अब स्कोर था 366/1, अब 12 ओवरों में 76 रन चाहिए थे. दिलीप वेंगसरकर इयन बॉथम को कैच दे बैठे और उनके बाद आये युवा खिलाड़ी कपिल देव 0 पर आउट हो गए.. सभी आश्चर्य में थे कि कप्तान वेंकटराघवन ने नम्बर 4 पर गुंडप्पा विश्वनाथ को न भेजकर कपिल को क्यों भेजा, इससे पिछली बार जब भारत ने 403 का लक्ष्य प्राप्त किया था तो उसमें गावस्कर और विश्वनाथ दोनों ने शतक लगाए थे. 389 के स्कोर पर सुनील गावस्कर चौथे विकेट के रूप में 221 के व्यक्तिगत स्कोर पर इयन बॉथम की गेंद पर डेविड गावर को कैच दे बैठे, 8 घंटे से अधिक समय बल्लेबाजी करने के बाद वो टीम को विजय के द्वार तक ले जा चुके थे पर दुःखद ये रहा कि टीम 46 गेंदों में 49 रन नहीं बना पाई. सुनील गावस्कर की ये पारी आज भी टेस्ट मैच में रन चेज़ में खेली गई सर्वश्रेष्ठ पारियों में गिनी जाती है।

1979 में भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर गई तो इमरान खान ने सुनील गावस्कर को तेज गेंदबाजों के खिलाफ सबसे बेहतरीन बल्लेबाज कहा.. कहें भी क्यों न…. उस समय वेस्टइंडीज़ टीम के खिलाफ 13 शतक लगाना सबके बस की बात तो नहीं थी।

बिना किसी खास प्रोटेक्शन के माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, मैल्कम मार्शल और डेनिस लिली जैसे खूँखार गेंदबाजों का सामना करने के बाद शीर्ष पर रहने वाला बल्लेबाज.. उन्हें ये बताने वाला कि आप भले ही डेढ़ सौ किलोमीटर प्रतिघंटे से ज्यादा तेज गति से बॉडीलाइन गेंदबाजी कर लो, मैं गिरने वाला नहीं… आप घायल करके या डरा के मुझे पवेलियन नहीं भेज सकते, मेरा विकेट लेने के लिये आपको बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी….. टेस्ट क्रिकेट में नौ हजार और दस हजार रन बनाने वाला पहला बल्लेबाज, 30 शतकों तक पहुंचने वाला पहला बल्लेबाज… ऐसा खिलाड़ी जिसने भारतीय बल्लेबाजों की आने वाली पीढ़ियों को बताया कि वो उच्च स्तरीय तेज गेंदबाजी को न सिर्फ खेल सकते हैं बल्कि डॉमिनेट कर सकते हैं, आवश्यकता है तो मजबूत तकनीक और कलेजे की ।

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