Current AffairsUncategorized

This is how Chaiwala and Cancer Surgeon started to fight


They were known as two close frineds, then the poster boys of Gujrat Hindutva Cader. One was renowned Cancer surgeon and another was Chaiwala. They both dedicated their youth for the Cause of Hindutva. During 80’s they were hawkish towards secularism, totally against secular ideology. Doctor was kind of aggressive and intellectual personality. Chaiwala was ordinary Pracharak. Sangh wanted both to grow. Then on a sudden day of 1984 Chaiwala was inducted into BJP. Even after that Cancer Surgeon always rode the bike with Chaiwala as pillion. They remained good friends till The Chaiwala got the taste of political power.

The duo executed plans in well phased manner. This successful execution led BJP to power in 1995. Keshubhai Patel became Chief Minister. Cancer surgeon and Chaiwala remained in core committee of BJP. Cancer surgeon had better say in government that that of Chaiwala. Later when Shankar Singh Waghela imprisoned Dr. Togadia, it was Modi who took the streets in support. Later when Dr. Togadia gained consideratble power in state BJP, Modi was with Delhi BJP.

Dr. Togadia was one of the few leader who had a say in decisions of L. K. Advani. Dr. Togadia agreed to the change and got his close ally Gordhan Zadaphia as Home Minister in Modi Cabinet. During this time Dr. Togadia enjoyed power to post police officers as his wish.

Things got changed when Modi won the election. Modi immediately dropped Zadaphia from cabinet and close aides of Dr. Tagadia were booked for political cases. The relationship between Dr. Togadia and Modi was spoiled when Modi, under the Supreme Court pressure, opened up 2002 Riot cases. Many BJP, VHP and Bajrang Dal workers were arrested. On the instructions of Modi, VHP workers, who were protesting against Advani, were beaten up by Police in Ahmedabad. The Government also demolished nearly 300 temples in Gandhinagar, which provoked VHP Leader Ashok Singhal to compare Modi with Gazji.

Later, Modi and Singhal patched up. Dr. Togadia remained away from Modi. In recent years, Dr. Togadia remained in VHP as Working President. He kept doing social work along with the propaganda of Hindutva Ideology. On other End Modi Enjoyed power in politics. Now he got everything under his say and we see Dr. Togadia is being thretened.

Incidence with Dr. Togadia remembers me of Political Murder of BJP leader Haren Pandya. Dr. Togadia has got Z+ security. Since last few days cases against Dr. Togadia are being re-opened. It all gives me a sense that Modi has to everything to settle his scores with Dr. Togadia.

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Current Affairs

Less than 2% Indians paid Income Tax in 2015-16; Government may bring new Income Tax Code.


When it comes to tax matters, Indians are the tax evaders. The country with population more than 125 Cr. is struggling with the tax collections. Recently, Income Tax Department of India issued statistics of Income Tax Collection AY 2015-16. It was found that a total of 4.06 Crore (Approx 3%) Indians filed Tax returns and interesting fact is only 2 Crore Indians paid taxes. It simply shows that 50% of Tax returns are filed as Nil returns.

As per Income Tax Department, most of the small businesses filed returns without proper books of accounts. It is not a good sign. Despite of this, Revenue officers think that GST may boost Income Tax collection. Government has already considered this and Prime Minister ordered Tax committee to create new simplified Direct Tax code.

On an average, it is found that people are reluctant about tax matters and Performance of IT dept is under scrutiny. It is being said that upcoming 2-3 years may change this scenario forever.

Here are some of the shocking facts

  • Only 5 Indians reported income more than ₹100 Cr.
  • 69 Indians reported Income between ₹25 Cr to ₹100 Cr.
  • 97% Indians have not filed income tax returns.
  • Out of remaining 3% Indians only 1.5% Indians paid taxes.
  • Income tax collection reduced as compared to AY 2014-15.
  • Salaried employees are found to be more sincere in Tax matters.

Keeping eye on these facts government has stepped up to introduce new Direct Tax Code. Current Income Tax is cumbersome statute and is 50 years old with too many temporary amendments and that’s why Prime Minister Modi ordered Finance Ministry to set up a Special Task force to draft a new Direct Tax code.

The new tax law will be drafted keeping in mind the infrastructural developments in other countries.

4 Years ago UPA Government tried to introduce Direct Tax Code, 2013 but it was lapsed with the dissolution of the Lok Sabha. The new bill is expected to be introduced only after the end of 2018.

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जो सचमुच जानते थे “असंख्य” को : श्रीनिवास रामानुजन


22 दिसम्बर उन महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जन्मदिवस होता है, जो विश्व के महानतम गणितज्ञों में गिने जाते हैं और जिन्हें गणित के क्षेत्र में वही सम्मान प्राप्त है, जो विज्ञान के क्षेत्र में अल्बर्ट आइन्सटीन को| उनके लिखे कई सूत्र या प्रमेय आज भी हल नहीं किये जा सके है, या कहें कि उनकी उपपत्ति आज भी उपलब्ध नहीं है मगर उन सूत्रों का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में बहुत सफ़लता के साथ हो रहा है। पूरी दुनिया के तमाम महान वैज्ञानिक और गणितज्ञ रामानुजन के द्वारा लिखे गये सूत्रों पर आज भी गहन शोध कार्य कर रहे हैं।

श्रीनिवास रामानुजन का जन्म तमिलनाडु में इरोड में एक बहुत ही साधारण परिवार में 22 दिसम्बर, 1887 को हुआ था। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के बालक थे और अद्वितीय प्रतिभा, तर्कशक्ति और सृजनात्मकता के धनी थे। मद्रास विश्वविद्यालय से सन 1903 में उन्होंने दसवीं की परीक्षा कई पुरस्कारों के साथ पास की। हाई स्कूल के बाद ही उन्हें अत्यन्त प्रतिष्ठित “सुब्रयमण्यम छात्रवृत्ति” प्रदान की गयी जो कि उस समय गणित और अंग्रेजी के बहुत उत्कृष्ट छात्रों को दी जाती थी।

उनका मन गणित की कठिन से कठिन समस्याओं को सुलझाने में खूब लगता था और इसी कारण वे अन्य विषयों में उचित ध्यान न दे पाने की वजह से ग्यारहवीं कक्षा में फेल हो गये। 1906 में उन्होंने एक बार फिर मद्रास के पचियप्पा कॉलेज में ग्यारहवीं में प्रवेश लिया, और सन 1907 में उन्होंने बारहवी कक्षा की परीक्षा असंस्थागत विद्याथी के रुप में दी मगर पास नहीं हो पाये। उनकी परंपरागत शिक्षा यहीं समाप्त हो गयी पर ज़िन्दगी के विभिन्न पहलुओं और कष्टों को लगातार झेलते हुये भी उन्होंने गणित में अपना शोधकार्य सतत जारी रखा।

इसी बीच 14 जुलाई, 1909 को रामानुजम का विवाह कुंभकोणम के पास राजेन्द्रम गाँव के सम्भ्रान्त परिवार वाले श्री रंगास्वामी की पुत्री जानकीअम्मल से हो गयी। इसके बाद वे नौकरी की तलाश में निकल पडे, परन्तु बहुत प्रयास करने के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली| बाद मे वे अपने पूर्व शिक्षक प्रोफेसर अय्यर की सिफारिश पर नैल्लोर के तत्कालीन जिलाधीश श्री आर. रामचंद्र राव से मिले जो कि उस समय इंडियन मैथमैटिकल सोसाइटी के अध्यक्ष भी थे।

आर. रामचंद्र राव ने श्रीनिवास रामानुजन की नोटबुक देखकर उनकी योग्यता समझते हुये उनके लिये पच्चीस रुपये प्रतिमाह की व्यवस्था कर दी थी। सन 1911 की शुरुआत से लगभग एक साल तक रामानुजम को यह पारितोषिक प्राप्त होता रहा। इसी साल रामानुजम का प्रथम शोध पत्र “जनरल ऑफ इंडियन मैथमेटिकल सोसाइटी” में प्रकाशित हुआ जिसमें उन्होंने बरनौली संख्याओं के बारे में अध्ययन किया था।

एक वर्ष तक की अवधि वाले पारितोषिक के खत्म होने के बाद 1 मार्च 1912 को उन्होंने जीवनयापन के लिये मद्रास पोर्ट ट्र्स्ट में क्लास 3, चतुर्थ ग्रेड के क्लर्क के बतौर मात्र तीस रुपये प्रति माह के वेतन पर नौकरी शुरु कर दी और इसी दौरण उन्होने विशुद्ध गणित के अनेक क्षेत्रों में स्वतंत्र रुप से शोध कार्य किया| मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में रामानुजन के अधिकारियों का रवैया बहुत ही सौहार्द पूर्ण था, वे रामानुजन की गणितीय क्षमताओं के प्रशंसक थे और चाहते थे कि रामानुजन गणित के क्षेत्र में अपना कार्य जारी रखें।

रामचन्द्र राव भी रामानुजन का पूरा ध्यान रखते थे और उनके ही कहने पर मद्रास इंजीनियरिंग कालेज के प्रोफेसर सी.एल.टी. ग्रिफिथ ने रामानुजन के कार्य को विभिन्न प्रसिद्ध और जानकार गणितज्ञों के पास भेजा, जिनमें यूनीवर्सिटी कॉलेज लन्दन के प्रसिद्ध गणितज्ञ एम. जे. एम. हिल प्रमुख थे। प्रो. हिल ने रामानुजन को अपनी समझदारी और प्रस्तुतिकरण में सुधार के सम्बन्ध में कई बार बहुत अच्छे सुझाव दिये लेकिन उन्होंने रामानुजन को विशुद्ध गणित में शोध के क्षेत्र में स्थापित होने के लिये कोई अन्य महत्वपूर्ण प्रयास नहीं किये|

इसके बाद रामानुजन ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रमुख गणितज्ञों को पत्र लिखने शुरु किये और इन पत्रों के साथ अपने शोध कार्य के कुछ नमूने भी भेजे ताकि वे उनके कार्य का प्रथम दृष्टतया मूल्याँकन कर सकें। इसी बीच रामानुजन के ही एक पूर्व शिक्षक प्रो. शेषु अय्यर ने उन्हें प्रो.जी.एच. हार्डी को पत्र लिखने की सलाह दी। 16 जनवरी 1913 को पहली बार रामानुजन ने प्रो. हार्डी को पत्र लिखा और साथ में स्वयं द्वारा खोजी गयी प्रमेयों को भी अलग से संलग्न किया। प्रो. हार्डी ने रामानुजन की प्रतिभा को स्वीकार करते हुये उन्हें इंग्लैंड बुलाने के लिये निमंत्रण भी भेजा मगर रामानुजन व्यक्तिगत कारणों से उस समय विदेश जाने को तैयार नहीं हुये पर हां, प्रो. हार्डी के साथ उनका पत्र व्यवहार चलता रहा।

बाद में 22 जनवरी, 1914 को प्रो.हार्डी को लिखे पत्र में वे इंग्लैड जाने के लिये सहमत हो गये और 17 मार्च 1914 को वह समुद्री जहाज से इंग्लैड के लिये रवाना हो गये। अप्रैल से कैम्ब्रिज में उन्होने प्रो. हार्डी से मिलकर शोधकार्य शुरु कर दिया। यहाँ उन्होंने गणित के सिद्धान्तों को और अच्छी तरह से समझने के लिये कुछ अच्छे प्रोफेसरों की कक्षाओं में जाना शुरु कर दिया। धीरे धीरे श्रीनिवास रामानुजन ने अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करना शुरु किया।

मार्च 1916 में उन्हें कैन्ब्रिज विश्वविद्यालय के द्वारा अपने 62 पृष्ठों वाले अंग्रेजी में प्रकाशित शोध लेख “हाईली कम्पोजिट नम्बर्स” के आधार पर बी.ए. (शोध के द्वारा) की उपाधि दी गयी। सन 1915 से 1918 तक उन्होंने कई शोध पत्र लिखे। 6 दिसम्बर, 1917 को रामानुजन प्रो. हार्डी के प्रयासों से लंदन मैथमेटिकल सोसाइटी में चुन लिये गये। । इसके बाद, मई 1918 में श्रीनिवास रामानुजन को “रॉयल सोसाइटी ऑफ लन्दन” का फेलो चुन लिया गया, जो उन दिनों किसी भी भारतीय के लिये बहुत ही सम्मान की बात थी।

गिरते स्वास्थ्य के बीच भी उनका शोधकार्य अनवारत जारी रहा और अपने चार साल के अल्प प्रवास में उन्होंने असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त कीं | 27 मार्च, 1919 को रामानुजन बम्बई आ गए, परन्तु उनका शोधकार्य जारी रहा| अपने अन्तिम समय में उन्होंने मॉक थीटा फलन और फाल्स थीटा फलन पर शोध कार्य किया जो कि उनका सबसे महत्वपूर्ण और विशिष्ट कार्य माना जाता है।

26 अप्रैल, 1920 को श्रीनिवास रामानुजन लम्बे समय तक खराब स्वास्थ्य के कारण सुबह ही अचेत हो गये और कुछ घन्टों बाद वह चिर निद्रा में सो गये। भारतीय प्रतिभा के प्रतीक और सिरमौर, जो अपने शोध कार्य और गणितीय प्रतिभा के कारण अनन्त काल तक हमें प्रेरणा देते रहेंगे, ऐसे श्रीनिवास रामानुजन को शत शत नमन एवम् विनम्र श्रद्धांजलि|

विशाल अग्रवाल (लेखक भारतीय इतिहास और संस्कृति के गहन जानकार, शिक्षाविद, और राष्ट्रीय हितों के लिए आवाज़ उठाते हैं। भारतीय महापुरुषों पर लेखक की राष्ट्र आराधक श्रृंखला पठनीय है।)

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When Akbar Was Almost Killed by a Hindu Queen

Rani Kiran Devi Bikaner

The period referred to here, is when the Mughals were ruling India and Rajputs were their only contenders. Maharana Pratap was known to be India’s greatest Rajput warriors. His brother was Shaktisingh whose daughter, Kirandevi was married to Prithvisingh, the ruler of Bikaner. Kirandevi was a beautiful and mighty woman. Being a Rajput she was daring and efficient with arms. She lived in Delhi with her husband.

Mughal ruler Akbar was ruling India at that time. Akbar apart from being a great Mughal ruler was also known for his lavish lifestyle. He had a strong penchant for women. To satisfy his lust, every year he would arrange for an exhibition in Delhi. It was known as the ‘Nouroz Mela’.The Rajput Queens, as well as the other women from Delhi, paid a visit to this exhibition in order to buy goods and jewelry. No men were allowed in there. Akbar disguised as a woman encroached the place every year to hunt for the woman in order to satisfy his desire.

One day Kirandevi came to the exhibition to see its pompous and offerings. Akbar had an eye on Kirandevi for a long time. Her presence in there kindled his desire and on his instruction, his men gypped Kirandevi to Akbar’s Palace.

Akbar was waiting for her in the palace. His burning desire for Kirandevi blinded him to the approaching danger. What Akbar didn’t know about the Rajput women was that they can take or give life for honor. He didn’t know about Rani Padmini who along with other women of her clang threw themselves into the fire for the honor. Kirandevi was no different. She belonged to the same clang. Just and when Akbar tried to touch her, she pulled the carpet beneath his feet and dragged him on the ground. She took out her dagger and pinned him to the floor rising on his chest. The great ruler of India was at mercy of a woman.

Akbar pleaded for his life. Kiran Devi promised to spare his life on the condition that Akbar will stop arranging for the ‘Nouroz Mela’ and will respect every woman going forward. On that day Akbar realized the power of Indian women and promised to abide by them.

Rani Kirandevi proved how determination, will, and despair can bring out the strength from within. ‘Defence’ is not merely a word for self-protection but it has the power to belittle even the King of Kings.

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This Actress Was Dating M S Dhoni!

Raai Laxmi

When Neha Dhupia refused to work in Julie 2, popular South Indian actress Raai Laxmi was then roped in to step into her shoes!  You will wonder to know  that Sansakari Pahlaj Nihalani is one of the distributors of this film, which portrays the actress in a super hot avatar.


Moreover, the actress is also making headlines for her alleged affair with skipper Mahendra Singh Dhoni.


In an interview with Hindustan Times earlier, the actress who has done 49 films as of now, confessed that she dated Dhoni about five years ago.

“I was the brand ambassador for the team that he was a part of and we were together for less than a year. We had never committed to each other and never thought of getting married either, so I don’t understand why people would talk about us. It didn’t work for us, so we moved on,” she had said.


She further said,

“I’ve begun to believe that my relationship with Dhoni is like a stain or a scar which won’t go away for a long time.”

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Finally, Bipasha Basu Gets Some Work

Bipasha Basu

Being a Bollywood actress, it is quite difficult to get a job when you are getting older. Bipash Basu is no exception. Last a few years had been hard time for her. Anyhow she got some work. Here’s what it is:

Bipasha Basu and Karan Singh Grover have been steaming it up with their latest photos on social media. These are nothing else but snapshots of the video advertisement they are doing for a condom brand.

Image: Source





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Men's CornerUncategorized

सभी पुरुष स्वभाविक बलात्कारी हैं!

all men are rapist

Every man is potential rapist… अर्थात हर पुरुष स्वभाविक बलात्कारी है।

कुछ ऐसी ही मानसिकता है भारत के नारीवादी समुदाय की पुरुषो को लेकर। और ये मानसिकता इतनी गिर चुकी है कि इसमें ऋषि मुनियों तक को नीच स्त्रिया घसीट लेती है ।

सवाल ये है कि मै ऋषि मुनियो की तो आपने बात कर ली लेकिने देवियो ,स्त्रियो और अप्सराओं की बात क्यों नही की??? क्यों न औरत को potential rapist और potential prostitute दोनो कहा जाए???

अर्जुन के पीछे उर्वशी पड़ी थी सेक्स के लिए….अर्जुन ने इनकार किया तो उसे नपुंसक हो जाने का श्राप दे दिया

राम के पीछे सूर्पनखा पड़ी थी….

विश्वामित्र के पीछे मेनका पड़ी थी…

जब इतिहास के पन्ने पलटे जाते है तो एक से बढ़कर एक धूर्त स्त्रियो के कारनामे पढने को मिलते है। श्रीमद भागवत में एक ऋषि की कथा आती है कि ऋषि एक बार हिमालय के वनों में घूम रहे थे। उनका तेज देखकर एक अप्सरा उन पर मोहित हो गयी और उनसे संभोग करने का निवेदन करने लगी। ऋषि को जब लगा कि वो अप्सरा से अपना पिंड नही छुड़ा पाएंगे तो उन्होंने अग्नि देव का आवाहन किया और उनकी सहायता से वो वहां से अदृश्य हो गए….

मानसरोवर क्षेत्र में धूर्त अप्सराओं ने ऋषि अष्टावक्र के साथ अश्लील हरकतें की थी …तंग आकर ऋषि अष्टावक्र ने श्राप दे दिया था।

भाई बात बिल्कुल सीधी है।।भारतीय स्त्री उपासक समाज मे यौन अपराधो के मामलों में सिर्फ पुरुष बदनाम है।। इंद्र का अहिल्या के साथ किया गया छल तो सबको याद है लेकिन उर्वशी का अर्जुन के साथ संभोग न कर पाने पर दिया गया श्राप किसी को याद नही…

फिर इन औरतो को potential बलात्कारी क्यों न कहा जाए…..

एक पुरूष रेप करता है तो पूरे देश मे आग लग जाती है ।लेकिन महिला अगर ऐसा करे तब सबको सांप क्यों सूंघ जाता है?? बैंगलोर में महिला टीचर कक्षा 8वी के लड़के से सेक्स करती थी और जान से मारने की धमकी देती थी…..ये खबर सुर्खिया क्यों न बटोर सकी??? क्योंकि बलात्कारी खुद एक महिला थी….और ऐसी घटनाएं न जाने कितनी है। अमेरिका यूरोप में तो हर साल न जाने कितनी औरतो को रेप के आरोप में जेल होती है….सिर्फ भारत ही महान है जहां हम वैश्याओ की पूजा करते है।।

महिलाओ के अंदर पुरुषो के मुकाबले ज्यादा टेस्टोरेंट नामक सेक्स रसायन पाया जाता है। जब एक पति से संतुष्टि नही मिलती तो पति एवं बच्चों को छोड़कर या तो भाग जाती है या प्रेमी के साथ मिलकर बच्चो पति की हत्या कर देती है…..कही तो माँ बाप की हत्या करके लड़कियों ने प्रेमी के साथ सेक्स किया…..संत बनकर भी राधे माँ,गुरुमा आनंदमयी जैसी महिला संत दिन रात सेक्स की ही बाते करती है। कागज के टुकड़ों पर औरते फिल्मो में नंगी हो जाती है। तो कही सास अपने दामाद के साथ ही हमबिस्तर होना चाहती है…. फिर इन औरतो को potential prostitute अर्थात स्वाभाविक वैश्या क्यों न कहा जाए??? बेटा माँ को अगर प्रेमी के साथ सेक्स करते देख ले तो कुछ ही क्षणों में बेटे की लाश पाई जाती है..तो कही प्रेमी के साथ सेक्स करती बहन अपने भाई को मौत के घाट उतार देती है। तो कही एक कामोन्मुक्त बेटी अपने पिता की जीवनलीला समाप्त कर देती है…..

अर्धनग्न घूमना, स्तन जांघ इत्यादि का बेशर्मी से प्रदर्शन करना, पुरुषो को सोच बदलने की नसीहत देने वाली तथा कभी न खत्म होने वाली इस बहस के पीछे भी Potential prostitute वाली मानसिकता ही काम करती है। कोई स्वीकार करे या न करे लेकिन potential rapist(women) और potential prostitute का सत्य मछली के तेल से भी ज्यादा कड़वा है।।

– कृष्ण कुमार त्रिपाठी

(लेखक के निजी विचार)


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Current AffairsLifeStyleUncategorized

यदि बिल गेट्स मजहब शुरू करे

yadi bil gates majhab shuru kare

यदि बिल गेट्स मजहब शुरू करते तो पवित्र किताब की आयतें इस प्रकार होतीं-

विंडोज  ही एकमात्र ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो लिनक्स या मैक यूज करता है उसके खिलाफ जिहाद करो।

पवित्र महीना(मार्च का क्लोजिंग वाला) बीतते ही उनके ऑफिस पर धावा बोलो।उनका कम्प्यूटर तोड़ दो, हार्डडिस्क निकाल लो क्योंकि लूट के माल पर तुम्हारा ही हक है।

अगर वो फिर भी नहीं मानते हैं तो उनसे जजिया वसूली करो।

अगर वो तौबा कर लेते हैं विंडोज एक्सपी इंसटाल करवा लेते हैं तो उन्हें माफ़ कर दो, निश्चय ही तुम्हारा सी ई ओ बहुत रहमदिल और दयालु है।

हमने उनके लिए ग्राफिक इंटरफेस दिया, अधिक मेमोरी और अधिक स्टोरेज का सपोर्ट दिया फिर भी वो जाहिल कमांडलाइन इंटरफेस यूज करते हैं, उनके लिए बड़ा अजाब है। कयामत के दिन उनकी हार्डडिस्क क्रैश हो जायेगी और कैबिनेट में आग लग जाएगी।

हे ‘एक्सपी’ यूज करने वालों! तुम उबन्तु और रेडहैट वालों को मित्र न बनाओ। ये आपस में एक दूसरे के मित्र हैं। और जो कोई तुम में से उनको मित्र बनायेगा, वह उन्हीं में से होगा। निःसन्देह गेट्स जुल्म करने वालों को मार्ग नहीं दिखाता।

वे चाहते हैं कि जिस तरह से उन्होंने एंड्रॉयड यूज किया उसी तरह से तुम भी हो करो, फिर तुम एक जैसे हो जाओः तो उनमें से किसी को अपना साथी न बनाना जब तक वे विंडोज की राह में हिजरत न करें, और यदि वे इससे फिर जावें तो उन्हें जहाँ कहीं पाओं पकड़ों और उनका वध (कत्ल) करो। और उनमें से किसी को साथी और सहायक मत बनाना।

‘हे ‘एक्सपी’ यूज करने वालों! अपने बापों और भाईयों को अपना मित्र मत बनाओ यदि वे एक्सपी की अपेक्षा उबन्तु को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे

”जिन लोगों ने हमारा सर्टिफिकेशन लेने से’ इन्कार किया, उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह गेट्स प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी है।

विंडोज वालों में से होंगे जो पाइरेट करेंगे । तुम सोचोगे वो माइक्रोसॉफ्ट से है, पर वो माइक्रोसॉफ्ट से नहीं है । वो कहेंगे “ये माइक्रोसॉफ्ट से है”, लेकिन वो माइक्रोसॉफ्ट से नहीं है । वो उनकी साजिश है माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ, और वो इसको जानते हैं (जान बूझ कर करते हैं )।

XP के बाद ऑफिस इनस्टॉल करना तुम पर कत्तई फर्ज होगा! इसके अलावा लोटस और पेजमेकर के अँधेरे में जीने वालों को ऑफिस पर ले आना दीन और बड़े शबाब का काम समझा जाएगा – इस नेकी के एवज में परवरदिगार क़यामत के रोज तुमसे हबीब बन कर मिलता है और तुम्हे दोजख के थपेड़ों से बचा कर दूध और शहद की नदियाँ अता फरमाता है!

हर विंडोज यूजर अपने साथ 4 usb डिवाइस लगा सकता हैं बशर्ते ऐसे वह किसी बेसहारा usb को सहारा दे रहा हो और पहली Usb को कोई दिक्कत न हो ।
55 साल के कंप्यूटर पे 9 साल पुरानी Usb लगा सकते हैं ।

‘निःसंदेह गेट्स ने ‘एक्सपी वालों से उनके प्राणों और उनके मालों को इसके बदले में खरीद लिया है कि उनके लिए ‘पॉर्न से भरी 500 जीबी हार्डडिस्क हैः वे विंडोज के मार्ग में लड़ते हैं तो मारते भी हैं और मारे भी जाते हैं।”


नोट- यह किसी की भावनाएं आहत करने के लिए नहीं लिखा गया है। यदि किसी मजहब से इसकी समानता होती है तो मात्र संयोग कहा जायेगा।

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Warning Signs of Girls Who can Create a Chaos After Marriage

girls who can create caos after marriage

Some people wanted warning signs for bachelors post in English. So, here is the English translation, I repeat these are not Sureshot solutions but still can help a lot. How come I know all this? I have been a part of the pro – men movement for a long time and counseled 100s of men. Even tried to start a community center for men. (Remember you will find exceptional cases too in society but everyone is not so fortunate). All those men who are willing to get married but are confused how to choose a right girl, here are warning signs of girls who can create a chaos after marriage –

1) Avoid marrying a girl who has only sisters, sisters interfere a lot in other sister’s lives. This includes that girl too who is the only child of her parents.

2) Avoid marrying a girl who has a dominating mother, if the mother is taking all the decisions and father remains quiet it is a big warning sign. Such mother will never allow her daughter to live happily in a marriage. Remember if the mother does not respect her husband how come her daughter will respect you.

3) If the girl side family starts a sentence like this .” My that relative is a big shot “, it is a warning sign. Never marry in such a family who boasts a lot about their high profile relatives.

4) If the girl side has a habit of showing off in everything, stay away.

5) Be very cautious if girl’s side insists upon giving money to the account. It is up to you whether you want to take money or not ( remember even 25 paise spend in a marriage is dowry once you are married). The only benefit of taking money in the account is 5 Lakh will remain 5 lakh it will not turn into 10 lakh overnight. Best is ask them to deposit money in girls’ account.

6) If it is a love marriage please avoid a girl who expects gift all the time.

7) The girl who calls you all the time and does not give you space, avoid such girl.

8) If a girl is over possessive stay away from her, remember you are getting married not going to a jail.

9) Inquire about the girl pre-marriage properly whether she is having any physical or mental problem.If you have any doubt do not marry.

10) Remember what our elders said, not only girl her family should also be decent. A conservative but a very practical thought.

11) Rajshree, Dharma, Imtiaz Ali movie girls are in movies only, such girls do not exist in real world. Do not go by the movies, live a real life.

12) Elders are right when they say marry in your standard if you have a village background and the girl is from posh city there will be problems
13) Marry, when you feel like getting married. Do not marry in social or any kind of pressure.

P.S, I am not promoting arrange marriage from this post, both types of marriages have to deal with same problems

– Jyoti Tiwari, Men’s rights activist, social activist and a renowned author of best-selling novel ‘Anuraag’

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Gender IssuesMen's CornerUncategorized

भारत में लोग सिर्फ बेटा ही क्यों चाहते हैं ?

gender inequality in india

फेमिनिस्ट्स का बड़ा रोना होता है कि भारत में लोग सिर्फ बेटा ही चाहते हैं। हाँ तो चाहेंगे ही आप बचपन से बेटों को बंधुआ मज़दूर जो बनाते हो। बेटा जाओ दूध ले आओ, आंटी को घर छोड़ आओ, बहन का फॉर्म ले आओ, बैंक में आकउंट खुलवा कर दो. और बेटी अरे वो तो परी है ज़िन्दगी भर बेचारी को काम करना है अभी आराम दो इसको। इसका बोझ भी वही बेटा उठाएगा, बेटा नौकरी ढूंढ लो बहन की शादी करनी है। राखी आ गयी बहन के घर शगुन लेकर जाना है , कुछ सोने का देना शादी के बाद की पहली राखी है। एक बेटे के चक्कर में पांच बेटियां पैदा कर ली। अब बेटा सारी ज़िन्दगी इनके चक्कर में मज़दूर बना रहेगा। फिर यह भी सुनेगा अरे तुम तो लड़के हो तुम्हरी तो ऐश है। इस बेटे को खूब खिला पिला कर तंदुरुस्त रखा जाता काम जो आएगा आगे। असल में वो बेटा नहीं भविष्य का निवेश होता है, कोल्हू का बैल टाइप।

यहाँ तक कि यदि आपका पुत्र आपका बुढ़ापे में ध्यान न रखे तो आप उसको धारा 125 लगाकर कोर्ट में घसीट सकते हो। मगर बेटी से गुज़ारा भत्ता नहीं मांग सकते, वो तो परी है ना। देखा है कभी किसी फेमिनिस्ट को यह मांग करते हुए कि 125 में रेस्पोंडेंट बेटी को भी बनाया जाए। बस पितृसत्त्तात्मक सोच है बेटा चाहिए होता बोलकर उनका काम ख़तम हो जाता है। मरती भी पितृसत्ता है, कभी धर्म रक्षा के नाम कभी देश के नाम पर। कोई क्यों नहीं चाहेगा कि उसके घर बेटा हो ?

सौ पुत्रों के वरदान का अर्थ अब लगाइये आपको एहसास होगा कि वो सौ पुत्र कभी अपना जीवन नहीं जी पाते. सोच कर देखिये कौन ज़्यादा प्रताड़ित है !

और एक बात ज्यादातर महिलाएं बेटा चाहती हैं, यह मैं नहीं कह रही National Family Health Survey कहता है.

 – ज्योति तिवारी, पुरुष अधिकार कार्यकर्ता, लेखिका व सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य करती हैं. उनकी किताब ‘अनुराग‘ बेस्ट सेलर पुस्तक रही है.

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फेमिनिज्म- घृणा पर आधारित विघटनकारी मानसिकता
क्यों बिगड़ रहे हैं युवा? क्या सुधारने का कोई रास्ता है?
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