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Gender IssuesMen's Corner

फेमिनिज्म एक विकृत मानसिकता

    Feminism in India

    पिछले दिनों लंकिनी के वध पर पत्रकारों ने काफी बवाल मचाया था। तब मैंने लिखा था प्रभु लोगों कितने ही पुरुष रोज़ मर जाते हैं पर आप लोगों को कष्ट नहीं होता इस मृत्यु में ऐसा क्या ख़ास है जो चिल्ला रहे हो। प्रेश्या लिखने पर एक पडोसी पत्रकार बंधु नाराज़ हो गए (मानो दुनिया भर के पत्रकारों ने नेता वही हों )। इतने नाराज़ कि बोले तुम पर होगा तो पता चलेगा और ब्लॉक कर के चले गए। यह उनका लॉजिक था , इसी लॉजिक और दूसरों के लिए बुरा सोचने पर पूरा महिलावाद टिका हुआ है। किसी फेमिनिस्ट से बहस कीजिये लॉजिक आएगा, “सोच कर देखिये खुद की बहन के साथ हो तो ?” अरे प्रभु क्यों सोचे गलत, जब अच्छा सोच सकते हैं तो!

    जब आप ने मान लिया कि हर पुरुष रेप करने के इरादे से बाहर निकलता है , हर आदमी बस आपको ही ताड़ रहा है तो आपको दुनिया वैसी ही नज़र आएगी। “द हिन्दू ” की #vedikachaube कुछ नहीं बस उसी मानसिकता का शिकार हैं। यदि नीच मानसिकता ना हो तो कैसे किसी भगदड़ में आप यह कैसे सोच सकते हो कि आदमी मरणासन्न महिला को गलत तरीके से छू रहा है ? कैसे आपके नीच दिमाग में यह विचार आया कि हमारे भाई लोग इतने गिरे हुए हैं ? असल में यह वेदिका की खुद की निहायत गन्दी और नीच सोच थी जो उन्होंने दूसरों पर थोपनी चाही। वो खुद मरे हुए लोगों के नग्न शरीर देख रही थी और उनको लगा कि भाई लोग भी उन्ही की तरह नीच हैं।

    कुछ तो सुख प्राप्त होता है फेमिनिस्ट को इस देश के पुरुषों का चरित्र हनन करने में, कोई तो बात है कि यह महिलाएं हर आदमी को रेपिस्ट बनाने पर तुली हैं। कोई भाई किसी महिला का जीवन बचाये इससे पवित्र बात क्या हो सकती है ( मेरा अनुभव है कि ऐसे मुश्किल समय पर पुरुष ही बचाने आते हैं ) और उसपर यह इलज़ाम कि वो उसे गलत तरीके से छू रहा था इससे घटिया और क्या हो सकता है। अगली बार कोई भी पुरुष मदद से डरेगा या हिचकिचाएगा तो यही महिलाएं उसको नामर्द बोलेगी। यानी चित भी मेरी पट भी मेरी। “द हिन्दू “ने माफ़ी मांगी है मगर वेदिका को निकाल बाहर नहीं किया। किसी पुरुष की अस्मिता से खिलवाड़ जुर्म होता ही नहीं। कुछ वर्ष पूर्व श्वेता बसु प्रसाद नाम की अभिनेत्री वेश्यावृत्ति में पकड़ी गयी थी। उसके बारे में लिखने के बाद लगभग सभी अख़बारों ने प्रकाशित माफ़ी मांगी थी। यहाँ चार लाइन की माफ़ी है और वेदिका अब भी “द हिंदू “का हिस्सा हैं। कायदे से उनपर मुक़दमा दर्ज होना चाहिए और पूरी कानूनी कारवाही होनी चाहिए। किसी आदमी को रेपिस्ट बना दो मज़ाक है क्या!

     – ज्योति तिवारी, पुरुष अधिकार कार्यकर्ता, लेखिका व सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य करती हैं. उनकी किताब ‘अनुराग‘ बेस्ट सेलर पुस्तक रही है.

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      Jyoti Tiwari

      The author Jyoti Tiwari

      Jyoti Tiwari has co-authored research reports to Govt.Of India and has appeared on international radio shows as well for creating awareness about the issues that men go through. She is a published author of the book Anuurag which is a bestseller.

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