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“2018 और भारतीय क्रिकेट – प्रमुख घटनाएं”

1. “शाम तक खेलेंगे तो इनकी ……….”








केपटाउन में पहला टेस्ट हारने के बाद भारतीय टीम सेंचुरियन में दूसरे टेस्ट में भी मुश्किल स्थिति का सामना कर रही थी, 28 रन पर दो विकेट… क्रीज पर थे विराट कोहली और मुरली विजय। दूसरे दिन चायकाल के पहले स्कोर था 80 पर दो, नॉन स्ट्राइकर एन्ड पर खड़े विराट कोहली ने विजय से कहा, “शाम तक खेलेंगे इनकी ** फट जाएगी”. हालांकि वो शाम तक खेले पर पार्टनर बदलते रहे, कोई टिका नहीं, विराट ने 153 रन बनाए पर टीम हार गई। तीसरा और आखिरी टेस्ट जोहानेसबर्ग में था। सीरीज हार चुके थे पर हमारे लिए तो एक एक ओवरसीज टेस्ट विजय हीरा मोती है। इसलिए “Dead-Rubber” जैसा कुछ है नहीं अपने लिए। भाग्य से यहाँ टॉस जीते और एक ग्रीनटॉप पर बल्लेबाजी का निर्णय किया। पहली पारी में चेतेश्वर पुजारा और विराट ने अर्धशतक बनाए। पुजारा के धैर्य का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने खाता खोलने में 50 से ज्यादा गेंदें ली पर विकेट नहीं फेंका। दूसरी पारी में विराट और रहाणे ने अच्छी बल्लेबाजी की। गेंद “Fly” कर रही थी, पड़ने के बाद कहीं भी लग रही थी शरीर में। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने कहा कि आशा है कि अब कोई भी ये नहीं कहेगा कि भारतीय बल्लेबाज तेज पिच और तेज गेंदबाजों से डरते हैं। ये एक Low Scoring मैच था इसलिए यहाँ के 40-50 अच्छी पिच पर 90-100 के बराबर थे। यहाँ भारतीय टीम को जीत मिली। ये वो टेस्ट मैच था जिसने टीम को ये भरोसा दिया कि विदेश में टेस्ट जीत सकते हैं। जसप्रीत बुमराह ने अपनी डेब्यू सीरीज में 3 मैच में 14 विकेट लिए थे और Low scoring सीरीज में भी 3 टेस्ट में 286 रन बनाकर विराट सीरीज के टॉप स्कोरर थे।

2. “जिसने डुबाई बांग्लादेश की नैया, दिनेश भईया दिनेश भईया”

– भारत को जीत के लिए 12 गेंदों पर 34 रन चाहिए थे। एंट्री हुई दिनेश कार्तिक की। “नाग” रुबेल हुसैन फुफकार मारते हुए नागिन डांस करते हुए उन्नीसवें ओवर की पहली गेंद लेकर तैयार… पहली गेंद छक्का, दूसरी चौका फिर तीसरी भी छक्का… और छठी पर एक और चौका.. स्टेडियम और डग आउट में मौजूद नाग चौंक गए थे, ये कौन है… आखिरी गेंद पर 5 रनों की आवश्यकता…. गेंद ऑफ स्टम्प के थोड़ी बाहर औऱ कार्तिक के बल्ले से निकलने के बाद कवर बाउंडरी के बाहर… दिनेश कार्तिक ने सारे नागों का जहर निकाल लिया था और पिटारे में बंद कर दिया था। भले ही ये एक टी20 मैच था पर ये पारी और ये आखिरी शॉट बहुत बड़ा महत्व रखता है। यदि यहाँ हम हार जाते तो बांग्लादेशी चरस बो देते सोशल मीडिया पर। थैंक यू दिनेश भईया । इन दो ओवरों का जब भी देखा जाए अलग ही मजा देता है।

3. “Virat Kohli can play in England”

– सीरीज के पहले इंग्लिश मीडिया में सारी बातचीत विराट कोहली और 2014 में इंग्लैंड में उनके प्रदर्शन के इर्द गिर्द घूम रही थी। 2014 में विराट ने इंग्लैंड में 5 टेस्ट की 10 पारियों में मात्र 134 रन बनाए थे, 39 के उच्चतम स्कोर के साथ और जेम्स एंडरसन ने उन्हें 4 बार आउट किया था। माइकल होल्डिंग ने साउथ अफ्रीका दौरे के समय कहा था कि वे विराट को एक महान बल्लेबाज तब मानेंगे जब वो इंग्लैंड की मुश्किल बैटिंग कंडीशन में रन बनाएं। “क्या विराट स्विंग नहीं खेल सकते” इस प्रकार के प्रश्न हर ओर थे। पहला टेस्ट एजबेस्टन में था, इंग्लैंड ने टॉस जीतकर 287 रन बना दिये। जवाब में भारतीय टीम 100 रन पर 5 विकेट खो चुकी थी, 287 बहुत दूर थे। विराट कोहली ने यहाँ 149 रन बनाए… आखिरी दो विकेट के लिए 92 की और आखिरी विकेट के लिए 57 रन की साझेदारी हुई। चौथी पारी में भारत को 194 का लक्ष्य मिला। तीसरे दिन शाम तक भारतीय टीम 5 विकेट गँवाकर 110 रन बना चुकी थी। जीत 84 रन दूर थी और एकमात्र उम्मीद यह थी कि विराट क्रीज पर थे 43 रन बनाकर। अगले दिन सुबह विराट जल्दी आउट हो गए और टीम भी जल्दी ऑल आउट हो गई। ये हार बहुत दिनों तक चुभनेवाली हार थी क्योंकि मात्र 31 रन का मार्जिन था। दूसरे टेस्ट में हम कॉन्टेस्ट में ही नहीं थे और पारी से हार हुई। टीम सेलेक्शन की खबरें ज्यादा चर्चा में रहीं। तीसरे टेस्ट में जो रुट ने टॉस जीतने की हैट्रिक पूरी की और गेंदबाजी चुनी। विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे ने पहली पारी में बहुत ही शानदार साझेदारी की। रहाणे एक अरसे के बाद पुराने रंग में दिखे औऱ कई “फ्री फ्लोइंग स्ट्रोक” लगाए। Tea तक दोनों शानदार खेल रहे थे। हमारे दिमाग में चल रहा था कि क्या विराट और रहाणे दोनों शाम तक खेलेंगे क्योंकि “शाम तक खेलेंगे तो इनकी…….” पर दोनों चाय पीने के बाद आउट हो गए और शतक से भी चूक गए । भारत एक अच्छा स्कोर बना चुका था जिसके कारण एक बड़ी लीड मिली। दूसरी पारी में विराट ने शतक बनाया और पुजारा ने फॉर्म में वापसी की। भारत ने ये टेस्ट 203 रन से जीता और सीरीज में वापसी की। साउथैम्पटन में हुए चौथे टेस्ट में जो रुट ने फिर से टॉस जीत लिया।इंग्लैंड ने 246 रन बनाए और जवाब में भारतीय टीम का स्कोर था… 142 पर दो विकेट… सीरीज बराबर करने की उम्मीदें जिंदा थीं। चेतेश्वर पुजारा और कप्तान कोहली के बीच के अच्छी पार्टनरशिप चल रही थी और हमारे मन में फिर से विचार चल रहा था “शाम तक खेलेंगे तो इनकी………” पर विराट कोहली दोपहर में ही आउट हो गए और अजिंक्य रहाणे पिछले टेस्ट की फॉर्म को जारी नहीं रख पाए। एक समय जहाँ 100 रन की लीड लेने की सोच रहे थे अब 50 रन की लीड खाने के हालात पैदा हो चुके थे। स्कोर था 195 पर 8… यहाँ हमारे टेस्ट नम्बर 3 चेतेश्वर पुजारा ने एक बहुत ही शानदार शतक लगाया… लाजवाब पारी…. आखिरी दो विकेट के लिए 78 रन और आखिरी विकेट के लिए 46 रन की पार्टनरशिप… पुजारा 132 पर नाबाद लौटे। चौथी पारी में लक्ष्य मिला 244 का… एक बार तो ये स्कोर चेज करने लायक दिख रहा था पर 22 पर 3 गिर गए। कोहली और रहाणे के बीच सौ की पार्टनरशिप… स्कोर फिर से चेज करने लायक दिखने लगा… 123 पर 3 थे, जीत के लिए 121 और चाहिए थे, मोइन अली की एक गेंद रफ में गिरी, ज्यादा उछली औऱ विराट के दस्ताने को छूते हुए शॉर्टलेग पर खड़े एलेस्टर कुक के हाथ में चली गई और इसके साथ ही साउथैम्पटन में सीरीज बराबर होने की आशाएँ भी समाप्त हो गईं। भारतीय तेज गेंदबाजों ने साउथ अफ्रीका सीरीज के बाद इस पूरी सीरीज में भी शानदार प्रदर्शन किया था और बल्लेबाजी ने साथ दिया होता तो ये सीरीज जीती जा सकती थी। लॉर्ड्स टेस्ट के अलावा अन्य चारों मैचों में ऐसे हालात थे जहाँ भारतीय टीम मैच जीतने की ओर बढ़ रही थी पर महत्वपूर्ण मौकों को भुना न पाना महँगा पड़ा। विराट ने इस सीरीज में दो शतक और तीन अर्धशतक के साथ कुल 593 रन बनाए और जेम्स एंडरसन से एक भी बार आउट नहीं हुए… विराट के शानदार टेस्ट करियर में इंग्लैंड ही वो जगह थी जहाँ उनका बल्ला नहीं चला था। पिछले दो साल में शतक पर शतक लगाने के बाद भी यही सवाल होता रहता था कि इंग्लैंड में तो रन नहीं बनाए न…. आशा है कि अब ये कोई नहीं पूछेगा। इस सीरीज ने विराट कोहली को भारत के सर्वकालीन महान टेस्ट बल्लेबाजों की सूची में स्थापित कर दिया

4. “Rohit and Dhawan Show”

– इंग्लैंड से लौटते ही एक हफ्ते में भारतीय टीम को एशिया कप खेलना था। विराट कोहली को आराम दिया गया था और रोहित शर्मा को कप्तानी सौंपी गई थी। पूरी सीरीज में हमारे ओपनर्स ने जमकर कुटाई की, विशेषकर पाकिस्तान की, वो भी दो दो मैच में… रोहित के पुल शॉट काफी समय तक पाकिस्तानी फैन्स के दिमाग पर छपे रहेंगे। ABP न्यूज़ के कार्यक्रम में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर तनवीर अहमद का वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें वो कह रहा था कि विराट कोहली डर के मारे इस सीरीज से भाग गए हैं। आज वो वीडियो देखने में बड़ी सन्तुष्टि मिलती है। एशिया कप फाइनल में एक बार फिर से नागिन डांस देखने को मिला पर अपने सँपेरों ने सारे नागों को कंट्रोल कर लिया।

5. “You can never ever drop Cheteshwar Pujara from the 11” & “जस्सी जैसा कोई नहीं”

— साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड में सीरीज हार चुके थे पर फाइट दी थी इसलिए लग रहा था कि ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीती जा सकती है। ऑस्ट्रेलिया के पास स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर भले ही न हों पर सबको पता था कि ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीत के ढाई सौ बोर्ड पर लगा दिए तो स्टार्क, हेजलवुड, कमिन्स और लायन किसी भी बल्लेबाजी क्रम को परास्त कर सकते हैं। इंग्लैंड में सीरीज हारने में एक बड़ा फैक्टर पाँचों मैच में टॉस हारना भी था। इस साल टेस्ट मैचों में टॉस का रोल बहुत महत्वपूर्ण रहा और जिन मैचों में परिणाम आया उनमें लगभग 69% मैच टॉस जीतने वाली टीम ने जीते। भला हुआ विराट कोहली ने एडिलेड में टॉस जीता और पहले बैटिंग की। एक घण्टे बाद स्कोर था 41 पर 4… सारी एडवांटेज की ऐसी तैसी हो चुकी थी पर चेतेश्वर पुजारा क्रीज पर थे और अपनी स्पीड से रन बना रहे थे। 50 बनाने में पुजारा ने 153 गेंदें लीं। हर बल्लेबाज का अपना स्टाइल होता है औऱ रन बनाने की अपनी गति। 41 पर 4 के बाद यहाँ हमें पुजारा स्टाइल खेल की ही आवश्यकता थी पर टेल शुरू होने के बाद पुजारा ने गियर बदला और अगले 73 रन 93 गेंदों में ही बना दिए। दिन के आख़िरी ओवर में स्ट्राइक अपने पास रखने के चक्कर में मिड ऑफ पर खड़े पैट कमिन्स से पंगा लिया और एक जबरदस्त डायरेक्ट हिट पर रन आउट हो गए। जिस प्रकार वो खेल रहे थे और किसी तरह से आउट होने का चांस नहीं था। पुजारा की ये 123 रन की पारी जीत की नींव रख चुकी थी। भारत के 250 के जवाब में ऑस्ट्रेलिया 235 पर ऑल आउट हो गई। दूसरी पारी में भारत ने बेहतर बल्लेबाजी की, पुजारा ने 71 रन बना दिए और अजिंक्य रहाणे ने 70… ऑस्ट्रेलिया को लक्ष्य मिला 323 रन का… जबरदस्त फाइट की ऑस्ट्रेलिया ने, पर 31 रन पीछे रह गई। पहली बार भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज का पहला टेस्ट जीती भले ही “थोड़ा देर के लिए गोटी मुँह में था”… दूसरे टेस्ट में विराट कोहली ने पर्थ की मुश्किल पिच पर अपने करियर का सबसे बेहतरीन शतक लगाया और एक बार फिर साबित किया कि क्यों वो विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं… टेस्ट के दूसरे दिन वो शाम तक खेल गए थे और 82 पर नाबाद थे उनके साथ थे रहाणे और हमारे मन में विचार चल रहे थे “Tea तक खेलेंगे तो इनकी……..” पर दोपहर तक सब निपट गए और ऑस्ट्रेलिया ने 287 रनों का लक्ष्य दिया जो कि चौथे-पाँचवे दिन की इस पिच पर असम्भव था। भारततीय टीम 140 पर ऑल आउट हो गई और ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज में बराबरी कर ली। मुरली विजय का टेस्ट करियर यहाँ अनाधिकारिक रूप से समाप्त हो गया और KL राहुल का भी कुछ समय के लिए तो टेस्ट एकादश से बाहर रहना पक्का हो गया। “बॉक्सिंग डे टेस्ट” में डेब्यू हुआ मयंक अग्रवाल का जो पिछले काफी समय से रणजी ट्रॉफी में भर भर के रन बना रहे थे। मयंक ने शानदार 76 रन बनाए और हनुमा विहारी के साथ उनकी ओपनिंग पार्टनरशिप का परिणाम यह था कि सीरीज में पहली बार चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली को पारी की शुरुआत में नई गेंद नहीं झेलनी पड़ी…. अब बस आशा ये की जा रही थी कि ये दोनों शाम तक खेल जाएं…. क्योंकि शाम तक खेलेंगे तो क्या होगा आपको पता ही है पर इस बार ये दोनों न सिर्फ शाम तक खेले बल्कि अगले दिन दोपहर तक खेल गए। 170 रनों की साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया को पूरी तरह थका दिया। पीठदर्द से जूझते विराट अपना सौ बनाने से पहले आउट हो गए पर चेतेश्वर पुजारा ने एक बार फिर से अपने चिरपरिचित अंदाज़ में शतक बनाया… जीत की नींव यहाँ पड़ चुकी थी… चेतेश्वर पुजारा एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका सफल होना एक भारतीय टेस्ट क्रिकेट फैन को अलग ही खुशी देता है… वो वन डे क्रिकेट नहीं खेलते… T20 इंटरनेशनल और आईपीएल में जगह नहीं उनकी… वो एक ही फॉरमैट खेलते हैं जो खेल का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और सबसे चैलेंजिंग फॉरमैट है। भले ही ऑस्ट्रेलियाई मीडिया और रिकी पोंटिंग कहते रहें कि पुजारा की धीमी बल्लेबाजी के चलते भारत नहीं जीत पाएगा पर अगले दिन जसप्रीत बुमराह ने बता दिया कि पुजारा जैसी इनिंग खेलना इतना आसान नहीं है। ऑस्ट्रेलिया 151 पर ऑल आउट हो गई थी और 292 रन की लीड खा चुकी थी। उसके बाद औपचारिकता शेष बची थी। पांचवें दिन ईशांत शर्मा की बाउंसर ने नेथन लायन के बल्ले का बाहरी किनारा लिया और ऋषभ पंत के ग्लब्स में चली गई। भारत पहली बार ऑस्ट्रेलिया में बॉक्सिंग डे टेस्ट जीता है…. और पहली ही बार ऑस्ट्रेलिया में 2-1 से आगे है। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी Retain हो चुकी है। जसप्रीत बुमराह का ये मात्र नौंवा टेस्ट मैच था… पर इस पूरे साल जब भी किसी पार्टनरशिप को तोड़ने के लिए विराट कोहली इधर उधर देखते थे तो उनकी नज़रें जसप्रीत बुमराह पर आके रुकती थीं। जिस गेंदबाज को एक समय मात्र T20 के योग्य समझा जाता था वो आज भारतीय टेस्ट टीम का एक बहुत ही महत्वपूर्ण सदस्य है और विश्व के टॉप 2 तेज गेंदबाजों में है। चेतेश्वर पुजारा इस सीरीज के टॉप रन स्कोरर हैं और पहली बार किसी भारतीय बल्लेबाज ने ऑस्ट्रेलिया में जो जीते हुए मैचों में शतक बनाया है। 2018 की शुरुआत में चेतेश्वर पुजारा को अपने बल्ले से कई जवाब देने थे उन्होंने जवाब दे दिए हैं, अब कोई नहीं पूछेगा कि वो विदेश में रन बना सकते हैं या नहीं। ये साल भारतीय तेज गेंदबाजों जसप्रीत, ईशांत और शमी का रहा है। इन तीनों ने 34 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है और इस साल कुल 136 विकेट लिए हैं। इससे पहले ये रिकॉर्ड वेस्ट इंडीज़ के महान तेज गेंदबाजों माइकल होल्डिंग, जोएल गार्नर और मैल्कम मार्शल के नाम था।

ये साल विराट कोहली का साल था। टेस्ट क्रिकेट में 13 टेस्ट में 1322 रन, 5 शतक, 5 अर्धशतक… 55 की औसत.. इसमें से 11 टेस्ट SA, England,. Australia में, 1148 रन, 4 शतक, 4 अर्धशतक, 52 की औसत। वनडे क्रिकेट में तो विराट एक अलग ही लेवल पर हैं। मात्र 14 मैचों में 133 की औसत से 1202 रन, 6 शतक। इस साल वो वनडे इतिहास में सबसे तेज 10000 रन बनाने वाले बल्लेबाज हो गए, मात्र 205 पारियों में। परफॉर्मेंस के हिसाब से वो एक बार फिर से “ICC- Cricketer of the Year”, “Test Cricketer of the Year” और “ODI Cricketer of the Year” होंगे।

2018 का अंत अच्छा हुआ है। आशा करते हैं कि 2019 का आरम्भ अच्छा हो सिडनी में औऱ जहाँ जहाँ शाम तक खेलना पड़ा खेलेंगे, क्योंकि “शाम तक खेलेंगे तो इनकी……. “

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