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सौन्दर्य प्रतियोगिताओं के सामाजिक एवं आर्थिक निहितार्थ

    Manushi Chhillar

    तो मानुषी छिल्लर को मिल गया सौन्दर्य ताज और आप लहालोट हो उछलने लगे। छिल्लर ने कह दिया कि मां को मातृत्व और उसकी ममता का मूल्य सैलरी में मिलना चाहिए और आपको यह बड़ी अच्छी बात लगी। कसम से आपकी क्यूटनेस को नमन रहेगा।

    अब जरा पिछले पंद्रह दिनों के घटनाओं पर नजर डालिए। मूडीस(टाम मूडी नहीं)भारत की रेटिंग को Baa3 से Baa2 करता है। ईज आफ बिजनेस डूइंग की रैंक में भारत सौ देशों की श्रेणी में आ जाता है और तभी छिल्लर विश्व सुन्दरी बन जाती हैं।

    कई वर्ष पहले भारत सुन्दरी इन्द्राणी रहमान ने विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता के दौरान स्वीमिंग सूट पहनने से इनकार कर दिया था। परिणामतः इन्द्राणी रहमान विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता के दौर से बाहर कर दी गयीं।

    हमारी संस्कृति में सौदर्य बोध के साथ गहरे पवित्रता का भाव जुड़ा है। दीदारगंज की यक्षी का मूर्ति शिल्प हो या मोनालिसा की मुस्कान का चित्र, दोनों ही स्त्री-सौन्दर्य के उच्चतम प्रतिमान हैं। सौन्दर्य के प्रतिमानों के साथ पवित्रता का रिश्ता जुड़ा है प्रतियोगिता का नहीं।

    मानव का आदिम चित्त भेद नहीं करता है। कुरूपता एवं सौन्दर्य में कोई विभाजक रेखा नहीं खींचता है परन्तु आज का मानव चित्त जिसे कुरूप कहता है, आदिम चित्त उसे भी प्रेम करता था। आज हमने विभाजक रेखा खींच कर एक ऐसी बड़ी गलती की है जिसके चलते हम कुरूप को प्रेम नहीं कर पाते क्योंकि वह सुन्दर नहीं, दूसरी ओर हम जिसे सुन्दर समझते हैं, वह दो दिन बाद सुन्दर नहीं रह जाता है। परिचय से, परिचित होते ही सौन्दर्य का जो अपरिचित रस था, वह खो जाता है। सौन्दर्य का जो अपरिचित आकर्षण या आमंत्रण है, वह विलीन हो जाता है। इसी सौन्दर्य को विलीन होने से बचाने के लिए हमने मेकअप की शुरूआत की। मेकअप ओर मेकअप की पूरी धारणा बुनियादी रूप से पाखंड है क्योंकि स्वाभाविक सुन्दरता को किसी बनावट की जरूरत नहीं होती। फिर भी मेकअप का सामान बनाने वाली विश्व की दो बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां ‘यूनीलिवर’ एवं ‘रेवलाॅन/प्राक्टर एं गैम्बिल’, ‘मिस यूनिवर्स’ और ‘मिस वल्र्ड’ नामक सौन्दर्य के विश्वव्यापी उत्सव करती है। इन प्रतियोगिताओं की राजनीति समझने की जरूरत है।

    कुछ घटनाओं पर सिलसिलेवार नजर डालें

    १) सोवियत संघ के विघटन के तुरन्त बाद रूस की एक लड़की को विश्व सुन्दरी के खिताब से नवाजा गया।

    २) 1992-93 में जमैका ने जब उदारीकरण की घोषणा की तो उसी वर्ष जमैका की लिमहाना को विश्व सुन्दरी घोषित कर दिया गया।

    ३) बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को व्यापार की छूट देने के साथ ही वेनेजुएला को 1970 से आज तक ‘मिस वल्र्ड’, ‘मिस यूनिवर्स’ और ‘मिस फोटोजेनिक’ के तीस से अधिक खिलाब मिल चुके हैं।

    ४) दक्षिण अफ्रीका की स्वाधीनता के बाद राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला द्वारा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को आमंत्रण देने के पुरस्कार स्वरूप वास्तसाने जूलिया को ‘रनर विश्व सुन्दरी’ बनाया गया।

    ५) विश्व बैंक और अन्तरराष्ट्र्रीय मुद्राकोष के निर्देशों के तहत ढांचागत समायोजन का कार्यक्रम संचालित कर रहे क्रोएशिया और जिम्बाव्वे की लड़कियों को भी चौथा और पांचवा स्थान इन विश्वव्यापी सौन्दर्य उत्सवों में मिला।

    ६) 1966 में जब इन्दिरा गांधी के रुपये का 33 फीसदी अवमूल्यन किया तो उसी वर्ष भारत की रीता फारिया विश्व सुन्दरी बन बैठी।

    ७) मनमोहन सिंह द्वारा उदारीकरण और वैश्वीकरण की दिशा में चलाये जा रहे ढांचागत समायोजन के कार्यक्रमों का परिणाम हुआ कि 27 वर्ष बाद भारत के खाते में ‘मिस यूनिवर्स’ और ‘मिस वल्र्ड’ दोनों खिताब दर्ज हो गये। फिर भी 97 मंे मुरादाबाद की डायना हेन ‘मिस वलर््ड’ के ताज की हकदार हो गयीं।

    ८) सौन्दर्य प्रसाधन बनाने वाली ‘रेवलाॅन’ ‘लैक्मे’ और ‘यूनीलीवर’ कम्पनियां विजेताओं को वर्ष भर खास किस्म के कब्जे में रखती हैं। वे कहां जायेंगी ? क्या बोलेंगीं ? क्या पहनेंगी ? सभी कुछ वर्ष भर तक ये प्रायोजित कम्पनियां ही तय करती हैं।

    ९) 1966 में विश्व सुन्दरी खिताब प्राप्त भारत की रीता फारिया को अमरीका-वियतनाम युद्ध के समय प्रायोजित कम्पनी में अमरीकी सैनिकों का मनोरंजन करने के लिए वियतनाम भेजा था।

    १०) ये कम्पनियां यह बेहतर ढंग से समती हैं कि विवाहित स्त्री का सौन्दर्य परोसने योग्य नहीं होता है इसलिए विजेताओं पर यह कठोर प्रतिबन्ध होता है कि ये वर्ष भर विवाह नहीं कर सकती हैं।

    उत्पाद बनने के लिये स्वतः तैयार नारी देह के सौन्दर्य अर्थशास्त्र का विस्तार इन विश्वव्यापी उत्सवों से निकलकर हमारे देश के गली, मुहे, शहरों, विद्यालय और विश्वविद्यालयों तक पांव पसार चुका है।

    भूमंलीकरण और भौतिकवाद के इस काल में स्त्री देह का उत्पाद या विज्ञापन बन जाना, उस नजरिये का विस्तार है, जिसमें स्त्री अपने लिये खुद बाजार तलाश रही है। विद्रूप बाजार में येन-के न-प्रकारेण अपना स्थान बना लेना चाहती है। उसे अपने स्थान बनाने की ‘अवसर लागत’ नहीं पता है। वह कहती है कि उसे यह तय करने का समय नहीं मिल पा रहा है कि किन-किन कीमतों पर क्या-क्या वह अर्जित कर रही है ?

    ‘फायर’ का प्रदर्शन वह अपने दमित इच्छाओं का विस्तार स्वीकारती है जिसके सामने पहले प्रेम निरुद्ध फिर विवाह के बाद प्रेम की वर्जना थी और अब ‘इस्टेंट लव’ के फैशन की खास और खुली स्वीकृति।

    पश्चिम के लिए विकृतियां ही सुखद प्रतीत होती है क्योंकि उनके लिए जीवन का सौन्दर्य अपरिचित हैं। भारत की अस्मिता और गरिमा भी इसलिये रही क्योंकि हमने अभ्यान्तर सौन्दर्य एवं शुद्धता को उसके पूरे विज्ञान को विकसित किया है।

    हमारा सौन्दर्य सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम् है। हमारा सत्यम् अनुभव है, शिवम् है – कृत्य, वह कृत्य जो इस अनुभव से निकलता है और सौन्दर्य है उस व्यक्ति की चेतना का खिलना जिसने सत्य का अनुभव कर लिया है। मांग और पूर्ति के अर्थशास्त्रीय सिद्धान्त बाजारवादी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं/ उत्पादों का मूल्य तय करते हैं। स्त्री देह के प्रदर्शन, उपलब्धता की पूर्ति का विस्तार मूल्यहीनता के उस ‘वर्ज’ पर खा है जहां मांग के गौण हो जाने का गम्भीर खतरा दिखायी दे रहा है इससे स्त्री सौन्दर्य के उच्चतम प्रतिमान तो खिर ही रहे हैं सौन्दर्य के साथ पवित्रता के रिश्तों में भी दरार चौड़ी होती जा रही है।

    ऐश्वर्या राय, सुष्मिता सेन, लारा दत्ता, प्रियंका चोपड़ा, डायना हेडन कैसे बनती हैं?

    लगभग हर बड़े ब्यूटी कॉन्टेस्ट में एक राउंड स्विमिंग सूट या बिकिनी राउंड भी होता है और इस में पहने जाने वाले कपड़े काफी छोटे होते हैं. इस राउंड में भाग लेने वाली मॉडल्स के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि अगर प्रदर्शन के दौरान उनके कपड़े हल्के से भी इधर या उधर खिसक गए तो उनके लिए बहुत अपमानजनक स्थिति हो सकती है और इसी स्थिति से बचने के लिए मॉडल्स बट ग्लू का इस्तेमाल करती है. बट ब्लू एक प्रकार की Gum होती है, जिस की पकड़ काफी मजबूत होती है और इसी की वजह से मॉडल्स बिकिनी राउंड में अपने कपड़े खिसकने से या इधर-उधर होने से बचाती है.

    यह एक खतरनाक सत्य है की ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने वाली सभी मॉडल अपने को बढ़-चढ़कर दिखाना चाहती है और इसी ख्वाहिश के लिए यह अपना वजन तेजी से घटाती है. लेकिन अब स्लिम ब्यूटी की जगह यह बात अंडरवेट ब्यूटी तक पहुंच गई है.
    अंडरवेट का मतलब होता है सेहत के लिए खतरनाक यानी कि आपका वजन आपके लंबाई के हिसाब से जितना होना चाहिए उससे कहीं ज्यादा कम जो सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक चीज है. 1930 के दौर में अमेरिका में एवरेज बीएमआई 20.8 थी, जो वैश्विक स्तर पर हेल्दी रेंज में रखी जाती है जबकि 2010 में अमेरिका में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने वाली लड़कियों की एवरेज बीएमआई 16.9 थी। इसे अंडरवेट माना जाता है|

    पहले माना जाता था की सुंदरता एक पैदाइशी गुण होता है लेकिन अब ब्यूटी कांटेस्ट के बढ़ते चलन ने इसे एक महंगा काम बना दिया है क्योंकि अब कम पैसों में ब्यूटी क्वीन नहीं बना जा सकता. वास्तव में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में मॉडल्स के मेकअप के ऊपर लाखों रुपया खर्च होता है जिसमें ड्रेस, मेकअप, हेयर स्टाइलिस्ट, पर्सनल ट्रेनर, कोच, ट्रांसपोर्टेशन तथा ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने वाली फीस इत्यादि होती है, जिनका खर्चा लाखों रुपए तक बैठता है. आमतौर पर यह खर्चा ब्यूटी कॉन्टेस्ट का लेवल और देश के अनुसार अलग अलग हो सकता है.

    सौंदर्य प्रतियोगिताएं यूं तो आधुनिक जमाने की उपज है लेकिन इसके कई नियम ऐसे हैं जो कि अपने आप में एक पुरानी सोच और दकियानूसी विचार ही दर्शाते हैं जैसे ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने वाली किसी भी मॉडल का अविवाहित होना जरूरी है. इसके साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि उसने बच्चे को जन्म ना दिया हो. इसके अलावा सौंदर्य प्रतियोगिताओं में मिस टाइटल वाली ज्यादातर प्रतियोगिताओं में एंट्री 25-26 साल तक ही मिलती है।

    तैयार रहिए बाहर तक झांकती कालर बोन हड्डियां, लाइपोसक्शन और कास्मेटिक सर्जरी की नई नई दुकानें, माडलिंग की आड़ में मुक्त देह की नुमाइशों, इनफर्टिलिटी, आत्महत्याओं और मानसिक अवसाद से घिरे नवयुवक नवयुवतियां आपका इन्तजार कर रही हैं।

     – डॉ. मधुसूदन उपाध्याय, लेखक भारतीय संस्कृति, इतिहास, कला, धर्म एवं आध्यात्म के गहन जानकार हैं।

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      Dr Madhusudan Upadhyay

      The author Dr Madhusudan Upadhyay

      Former HOD biotechnology at GCRG Group of Institutions. Expert of Sociao-economic issues.

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