Editorial

भाजपा ने कैसे छोड़ा राजस्थान चुनाव की रेस में कांग्रेस को पीछे?

राजस्थान चुनाव

इस वर्ष के शुरुआत से ही भाजपा को राजस्थान चुनाव की रेस में कांग्रेस से पीछे समझा जा रहा था। इसमें राजस्थान की एंटी इनकम्बेंसी और नेतृत्व से नाराजगी बड़ा कारण थी। पर पिछले एक महीने को घटनाक्रम को देखें तो भाजपा ने चमत्कारिक बढत बनाते हुए प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल गयी है। इसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कुशल चुनाव नीति का हाथ दिखाई देता है, जिसने कांग्रेस के हाथ को बैकफुट पर लाकर रख दिया है। आइये देखते हैं क्या हुआ इस एक महीने में जो भाजपा निकल गयी कांग्रेस से आगे?

राजस्थान चुनाव
राहुल गाँधी, सचिन पायलट और अशोक गहलोत

सबसे पहले भाजपा ने टिकट वितरण में बाजी मारी। भाजपा ने 11 नवम्बर को 131 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी जबकि कांग्रेस गुटों में बंट गई और मतभेद के कारण पहली सूची 4 दिन बाद 15 नवम्बर को जारी कर पाई। इससे भाजपा ने कूटनीतिक बढ़त हासिल करते हुए यह संदेश पहुंचाने में सफलता हासिल की कि कांग्रेस खेमों में बंटी हुई है।  इसके बाद भाजपा ने घोषणा पत्र भी कांग्रेस से पहले जारी कर दिया और आत्मविश्वास का संकेत दे दिया। 

टिकट वितरण में कांग्रेस की अंतर्कलह हुई जगजाहिर

टिकट वितरण के बाद कांग्रेस के मतभेद और भी खुलकर सामने आ गए जब कई विधानसभाओं से बागीयों ने ताल ठोक दी। बीकानेर में फिर भारी राजनीतिक उठापटक हुई जब कांग्रेस ने माली समाज की प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी। यशपाल गहलोत (माली) को कांग्रेस ने पहले बीकानेर पश्चिम से टिकिट दी और फिर वापस ले ली। और फिर यशपाल गहलोत को बीकानेर पूर्व की टिकिट देकर भी वापस ले ली गई। कन्हैयालाल झंवर को फिर से कांग्रेस ने बीकानेर पूर्व का प्रत्याशी बना दिया। दूसरी तरफ बीकानेर पूर्व से टिकिट कटने पर परम्परागत कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल गहलोत निर्दलीय नामांकन भर दिया। इससे माली समाज में कांग्रेस और रामेश्वर डूडी के प्रति भारी रोष व्याप्त हो गया।

ऐसे ही टोंक में सचिन पायलट के टिकट का विरोध हुआ। चूरू से कांग्रेस प्रत्याशी रफीक मंडेलिया के विरोध में चुरू के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिया राहुल गांधी के निवास के बाहर धरना दिया था। नागौर, मकराना डीडवाना, (नागौर), उदयपुरवाटी सीकर (सीकर), मसूदा (अजमेर) में भी कांग्रेस के खिलाफ भारी बगावत हुई है। किशनपोल (जयपुर शहरी) में कांग्रेस प्रत्याशी अमीन कागजी के विरोध में कांग्रेस के बागी बृजकिशोर शर्मा ने जमकर विरोध किया। जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भी भुनाया और बृजकिशोर शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी की बात का समर्थन भी किया। शाहपुरा (जयपुर ग्रामीण) से कांग्रेस के आलोक बेनीवाल भी बागी होकर निर्दलीय लड़ रहे हैं। राजस्थान चुनाव में कांग्रेस में करीब 30 विधानसभा सीटों पर बगावत हो गयी। इस तरह कांग्रेस में अशोक गहलोत, सचिन पायलट और रामेश्वर डूडी के बीच की अंतर्कलह चरम पर आ गई। 

बागियों को मनाने में भाजपा आगे।

हालांकि बागी भाजपा में भी थे। जैसे भाजपा के अलवर के बागी और हिंदूवादी नेता ज्ञानदेव आहूजा जिन्होंने पहले से त्रिकोणीय मुकाबले की हॉटसीट सांगानेर से निर्दलीय नामांकन भरा। परन्तु नामांकन वापसी के आखिरी दिन भाजपा ने उन्हें मना लिया और प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया। प्रधानमंत्री ने भी एक मंच पर उनकी पीठ थपथपाई। अंतिम दिन तक भाजपा 8 बड़े बागियों को मना पाई जबकि कांग्रेस सिर्फ 4 बागियों को ही मना पाई। भाजपा ने ज्ञानदेव आहूजा, भवानी सिंह राजावत, मंगलाराम कोली, अल्का गुर्जर, श्रीराम भींचर, तरुण कागा, प्रियंका चौधरी, पुष्पा कंवर को मनाया। जबकि कांग्रेस ने कृपाराम सोलंकी, रामचन्द्र सरधना, ब्रह्मदेव कुमावत और ललित भाटी को मनाया। 

टोंक में भाजपा ने चला तुरुप का पत्ता

टोंक में भाजपा ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के सामने अपने एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार यूनुस खान को उतारकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दीं। कांग्रेस ने टोंक में 46 साल बाद हिन्दू उम्मीदवार उतारा और भाजपा ने 38 साल बाद मुस्लिम प्रत्याशी उतारा। इससे विपरीत ध्रुवीकरण और परंपरागत वोटबैंक की खींचतान में मुकाबला रोचक हो गया है। सचिन पायलट की मुश्किल यह है कि 2013 राजस्थान चुनाव में भाजपा ने यह सीट 30343 वोटों के बड़े अंतर से जीती थी। वैसे भी राजस्थान में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव हारने की प्रथा रही है। खुद सचिन पायलट कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनने का बाद 2014 में अजमेर से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।

सचिन पायलट और युनुस खान

सीपी जोशी का जातिवादी बयान

सीपी जोशी ने उमा भारती की लोधी जाति का नाम लेकर और साध्वी ऋतंभरा की जाति पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा था कि हिन्दू धर्म के बारे में केवल पण्डित या ब्राह्मण ही धर्म की बात कर सकता है। इससे अन्य जातियों में सीपी जोशी के बयान से रोष फैल गया जिस कारण स्वयं राहुल गांधी को ट्वीट करके सीपी जोशी को माफी मांगने का फरमान सुनाना पड़ा। उसके बाद सीपी जोशी ने माफी मांगी। पर तब तक कांग्रेस का काफी नुकसान हो चुका था। 

योगी आदित्यनाथ की ताबड़तोड़ रैलियाँ

राजस्थान चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ उप्र सीएम योगी आदित्यनाथ की दर्जनों रैलियाँ रखी गईं हैं। वसुंधरा राजे, सचिन पायलट, अशोक गहलोत, भी रैलियों में जुटे हैं। राजस्थान चुनाव में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के स्टार प्रचारक बनके उभरे हैं। प्रदेश की सभी सीटों पर उनकी भारी डिमांड के चलते भाजपा ने उनकी कुल 21 रैलियां तय की हैं। जबकि प्रधानमंत्री मोदी की कुल 10 सभाएं होनी हैं। योगी आदित्यनाथ की फायरब्रांड छवि और तीखे भाषणों के कारण उनकी सभाओं में अप्रत्याशित भीड़ उमड़ रही है। योगी आदित्यनाथ के इस चक्रवाती चुनाव प्रचार में कांग्रेस का प्रचार फीका सा पड़ गया है। 

राजस्थान चुनाव
राजस्थान में एक चुनावी सभा में योगी आदित्यनाथ

हनुमान बेनीवाल के तीसरे मोर्चे से भाजपा को फायदा

राजस्थान में इस बार तीसरे मोर्चे के नाम से जाटों के बड़े नेता हनुमान बेनीवाल ने ताल ठोकी है| बेनीवाल शुरुआत से ही कांग्रेस के विरोधी रहे हैं पर 2013 से पहले भाजपा से बागी होने के बाद भाजपा का विरोध भी ऊँचे स्वर से कर रहे थे| अक्टूबर में इन्होने RLP पार्टी बनाई है| आर.एल.पी. की स्थापना जिन मुद्दों पर हुई है उनमें मुख्य मुद्दा पायलट, गहलोत, वसुंधरा, राठौड़ को चुनाव में हरवा के घर बैठाना था पर कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब आर.एल.पी. से सचिन पायलट, अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे और राजेंद्र सिंह राठौड़ के सामने एक भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा जाता है| रालोपा कुल 57 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें से अधिकांश जाट बहुल और कांग्रेस की परम्परागत सीट रही हैं| जाट कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे हैं इसलिए इन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले में सबसे ज्यादा वोट कांग्रेस के कटने के आसार हैं जिसका भाजपा को सीधा फायदा होगा|

हनुमान बेनीवाल

भाजपा सरकार की उपलब्धियां

भाजपा अपने अनेक कार्य जनता तक पहुंचाने में सफल दिखाई दे रही है। चाहे वो किसानों की कर्जमाफी हो या भामाशाह योजना की सफलता, सरकारी भर्तियां, स्वच्छता व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन, द्रव्यवती नदी, सरकारी योजनाओं का डिजिटलीकरण, पेयजल आपूर्ति में सुधार, रोड और हाईवेज़ का बम्पर निर्माण, उज्ज्वला योजना, फसल बीमा योजना, जनधन योजना, न्यूनतम समर्थित मूल्य में बढ़ोतरी, 625 करोड़ से राज्यभर के 125 महत्वपूर्ण मन्दिरों का पुनरूत्थान, नहर योजना, चिकित्सा व्यवस्था में सुधार जैसे अनेक विकास कार्यों के कारण राजस्थान में जनता भाजपा को एक बार फिर से जिताना चाहती है।

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जयपुर में द्रव्यवती नदी का उद्घाटन करतीं वसुंधरा राजे

यह हैं वो महत्वपूर्ण कारण जिनसे जो भाजपा एक महीने पहले बैकफुट पर समझी जा रही थी। वह एंटी इनकंबेंसी के बावजूद अब कांग्रेस से काफी आगे नजर आ रही है। 

This article can be read in English here,

How Did The BJP Overrun Others In Rajasthan’s Election Race?

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