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राजस्थान चुनाव पर मीडिया के एग्जिट पोल होंगे गलत साबित

राजस्थान चुनाव

इस साल के शुरुआत से ही भाजपा को राजस्थान चुनाव की रेस में कांग्रेस से पीछे समझा जा रहा था। इसमें राजस्थान की एंटी इनकम्बेंसी और नेतृत्व से नाराजगी बड़ा कारण थी। सभी चैनल एग्जिट पोल में भाजपा को राजस्थान में हारता हुआ दिखा रहे हैं| पर राजस्थान की जमीनी हकीकत तो कुछ और ही इशारा कर रही है| राजस्थान का रिकॉर्ड 74.08 प्रतिशत मतदान हुआ जो इसकी पुष्टि कर रहा है| यदि पिछले किसी भी चुनाव को देखें तो ज्यादा मत प्रतिशत भाजपा की विजय और कम मत प्रतिशत कांग्रेस के पक्ष में जाता है| पिछले एक महीने का घटनाक्रम को देखें तो भाजपा ने चमत्कारिक बढत बनाते हुए प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल गयी थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कुशल चुनाव नीति ने कांग्रेस के हाथ को बैकफुट पर लाकर रख दिया था।

राजस्थान के विधानसभा 2013 चुनाव में 75 प्रतिशत मतदान हुआ था जिसमें भाजपा को लगभग 45 प्रतिशत मत मिले थे और कॉंग्रेस को 33 प्रतिशत, मतलब लगभग 12 प्रतिशत का अंतर! यह मोदीलहर थी, निसंदेह! भाजपा ने स्वयं के प्रदर्शन में भी 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी जिसमें से साढ़े तीन प्रतिशत वोट उसने 2008 के मुकाबले कॉंग्रेस से खींचा था| 4-5 प्रतिशत निर्दलीयों व अन्य पार्टियों से और लगभग 2 प्रतिशत विंडफॉल गेन मतलब नए वोटरों का 90 प्रतिशत समर्थन जो कुल वोट का 2 प्रतिशत के करीब था।

मतदान प्रतिशत ही सीधे 9.5 प्रतिशत बढ़कर 74 प्रतिशत हो गया था, जहाँ भाजपा को सीधे सीधे 37 लाख मतों की बढ़त थी कॉंग्रेस पर! चलिए अब मान लेते है कि भाजपा ने जो कॉंग्रेस के साढ़े तीन प्रतिशत वोट लूटे थे, वे इस बार कांग्रेस ने reclaim कर लिए तो मत प्रतिशत पहुंचा भाजपा का 41.5 और कॉंग्रेस का 36.5 प्रतिशत|चलिए मान लेते है कि एन्टी इनकंबेंसी है तो 2 प्रतिशत और वोट भाजपा से सीधे कॉंग्रेस ने झटक लिए तब भी टैली पहुंची 39.5 प्रतिशत भाजपा के और 38.5 प्रतिशत कॉंग्रेस के|

इस बार जुड़े युवा वोटर्स भाजपा के साथ 

यहाँ एक बात नोट कर लीजिये की चाहे कुछ भी हो इन पांच साल में नए जुड़े वोटर जो कि 20 लाख के करीब हैं, उनका 90 ना सही 75 प्रतिशत अब भी मोदी का मुरीद है, जो भाजपा को मिलेगा विंडफॉल के रूप में| जो प्रतिशत मे जाकर हुआ 4.85 प्रतिशत (वोट पड़े 3.5 करोड़ (74 % turnout 4.75 करोड़ का, नवयुवा वोटर 20 लाख जिसका 85 प्रतिशत मतदान होता है| मतलब 17 लाख हुआ 4.85 प्रतिशत)| ये मानकर चलिए कि सभी सीटों पर फैले इस गेमचेंजर 4.85 नए वोटरों का 75 फीसदी कमसकम हुआ 3.7 प्रतिशत!

कुछ भी हो, एन्टी एन्टीइनकम्बेंसी की लहर “मोदी लहर” के बराबर भी हो तो भी उंसके नकारात्मक असर को केवल ये नवयुवा वोटर ही ठिकाने लगाने में सक्षम है| और भाजपा कम से कम 2-3 प्रतिशत आगे ही रहेगी कांग्रेस से| फिर भी क्लोज टैली के चलते 5-7 सीट कम ज्यादा हो सकती हैं| कम से कम भी मानकर चलें तो भाजपा 90-95 सीट से नीचे नहीं जा सकती| ज्ञातव्य है कि 2008 की भाजपा के विरुद्ध की भयंकर एन्टीनकंबेंसी लहर तक में भाजपा 78 सीट लाई थी| जबकि मोदी फैक्टर जैसा कुछ नहीं था तब जो कि अब हर चुनाव में महत्वपूर्ण होता है।

सबसे अंत में वह जनसमर्थन जो मोदी/योगी की रैलियों में दिखा वह है, स्मरण रखिये की राजस्थान में यूं ही कोई केवल चेहरा देखने/दिखाने नही आ जाता दिन बिगाड़कर| इसे अज्ञात बोनस मानकर चलिये कम से कम| जमीनी हकीकत यह है कि तय है कि वसुंधरा राजे भले विदा हो जाएँ पर भाजपा राजस्थान में फिरसे सरकार बना रही है| मीडिया के एग्जिट पोल मात्र वो पॉपकॉर्न हैं जो फ़िल्म चालू होने से पहले टाइमपास के लिए हैं कमर्शियल विज्ञापन देखते देखते।

अब चलिए दूसरे कारण देखते हैं कि चुनावों में भाजपा ने किस प्रकार जोरदार बढत बनाई थी?

राजस्थान चुनाव
राहुल गाँधी, सचिन पायलट और अशोक गहलोत

सबसे पहले भाजपा ने टिकट वितरण में बाजी मारी थी। भाजपा ने 11 नवम्बर को 131 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी जबकि कांग्रेस गुटों में बंट गई और मतभेद के कारण पहली सूची 4 दिन बाद 15 नवम्बर को जारी कर पाई। इससे भाजपा ने कूटनीतिक बढ़त हासिल करते हुए यह संदेश पहुंचाने में सफलता हासिल की कि कांग्रेस खेमों में बंटी हुई है।  इसके बाद भाजपा ने घोषणा पत्र भी कांग्रेस से पहले जारी कर दिया और आत्मविश्वास का संकेत दे दिया था। 

टिकट वितरण में कांग्रेस की अंतर्कलह हुई जगजाहिर

टिकट वितरण के बाद कांग्रेस के मतभेद और भी खुलकर सामने आ गए जब कई विधानसभाओं से बागीयों ने ताल ठोक दी। बीकानेर में फिर भारी राजनीतिक उठापटक हुई जब कांग्रेस ने माली समाज की प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी। कांग्रेस ने दो बार यशपाल गहलोत (माली) का टिकट काट दिया था। इससे माली समाज में कांग्रेस और रामेश्वर डूडी के प्रति भारी रोष व्याप्त हो गया था। ऐसे ही टोंक में सचिन पायलट के टिकट का विरोध हुआ था। नागौर, मकराना डीडवाना, (नागौर), उदयपुरवाटी सीकर (सीकर), मसूदा (अजमेर), शाहपुरा (जयपुर ग्रामीण) में भी कांग्रेस के खिलाफ भारी बगावत हुई थी। राजस्थान चुनाव में कांग्रेस में करीब 30 विधानसभा सीटों पर बगावत हुई थी। इस तरह कांग्रेस में अशोक गहलोत, सचिन पायलट और रामेश्वर डूडी के बीच की अंतर्कलह चरम पर आ चुकी थी, राजस्थान में कांग्रेस का संगठन भी मजबूत नहीं है। 

बागियों को मनाने में भाजपा हुई थी कामयाब

हालांकि बागी भाजपा में भी थे। जैसे भाजपा के अलवर के बागी और हिंदूवादी नेता ज्ञानदेव आहूजा, जिन्ह बाद में भाजपा ने मना लिया था| अंतिम दिन तक भाजपा 8 बड़े बागियों को मना पाई जबकि कांग्रेस सिर्फ 4 बागियों को ही मना पाई थी।

टोंक में भाजपा ने चला तुरुप का पत्ता

टोंक में भाजपा ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के सामने अपने एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार यूनुस खान को उतारकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दीं थी। कांग्रेस ने टोंक में 46 साल बाद हिन्दू उम्मीदवार उतारा और भाजपा ने 38 साल बाद मुस्लिम प्रत्याशी उतारा। इससे विपरीत ध्रुवीकरण और परंपरागत वोटबैंक की खींचतान में मुकाबला रोचक हो गया है। सचिन पायलट की मुश्किल यह है कि 2013 राजस्थान चुनाव में भाजपा ने यह सीट 30343 वोटों के बड़े अंतर से जीती थी। वैसे भी राजस्थान में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव हारने की प्रथा रही है। खुद सचिन पायलट कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनने का बाद 2014 में अजमेर से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।

सचिन पायलट और युनुस खान

सीपी जोशी का जातिवादी बयान

सीपी जोशी ने उमा भारती की लोधी जाति का नाम लेकर और साध्वी ऋतंभरा की जाति पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा था कि हिन्दू धर्म के बारे में केवल पण्डित या ब्राह्मण ही धर्म की बात कर सकता है। इससे अन्य जातियों में सीपी जोशी के बयान से रोष फैल गया जिस कारण स्वयं राहुल गांधी को ट्वीट करके सीपी जोशी को माफी मांगने का फरमान सुनाना पड़ा। उसके बाद सीपी जोशी ने माफी मांगी। पर तब तक कांग्रेस का काफी नुकसान हो चुका था। 

योगी आदित्यनाथ की ताबड़तोड़ रैलियाँ

राजस्थान चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ उप्र सीएम योगी आदित्यनाथ की दर्जनों रैलियाँ हुईं। वसुंधरा राजे, सचिन पायलट, अशोक गहलोत, भी रैलियों में जुटे रहे। राजस्थान चुनाव में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के स्टार प्रचारक बनके उभरे। प्रदेश की सभी सीटों पर उनकी भारी डिमांड के चलते भाजपा ने उनकी कुल 26 रैलियां हुईं। जबकि प्रधानमंत्री मोदी की कुल 10 सभाएं हुईं। योगी आदित्यनाथ की फायरब्रांड छवि और तीखे भाषणों के कारण उनकी सभाओं में अप्रत्याशित भीड़ उमड़ी। योगी आदित्यनाथ के इस चक्रवाती चुनाव प्रचार में कांग्रेस का प्रचार फीका सा पड़ गया था। 

राजस्थान चुनाव
राजस्थान में एक चुनावी सभा में योगी आदित्यनाथ

हनुमान बेनीवाल के तीसरे मोर्चे से भाजपा को फायदा

राजस्थान में इस बार तीसरे मोर्चे के नाम से जाटों के बड़े नेता हनुमान बेनीवाल ने नई पार्टी RLP बनाकर ताल ठोकी थी| बेनीवाल शुरुआत से ही कांग्रेस के विरोधी रहे हैं पर 2013 से पहले भाजपा से बागी होने के बाद भाजपा का विरोध कर रहे थे| आर.एल.पी. की स्थापना जिन मुद्दों पर हुई है उनमें मुख्य मुद्दा पायलट, गहलोत, वसुंधरा, राठौड़ को चुनाव में हरवा के घर बैठाना था पर कहानी में ट्विस्ट तब आया जब आर.एल.पी. से सचिन पायलट, अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे और राजेंद्र सिंह राठौड़ के सामने एक भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा| रालोपा कुल 57 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिसमें से अधिकांश जाट बहुल और कांग्रेस की परम्परागत सीट रही हैं| जाट कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे हैं इसलिए इन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले में सबसे ज्यादा वोट कांग्रेस के कटने के आसार हैं जिसका भाजपा को सीधा फायदा होगा|

हनुमान बेनीवाल

भाजपा सरकार की उपलब्धियां

भाजपा अपने अनेक कार्य जनता तक पहुंचाने में सफल दिखाई दी। चाहे वो किसानों की कर्जमाफी हो या भामाशाह योजना की सफलता, सरकारी भर्तियां, स्वच्छता व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन, द्रव्यवती नदी, सरकारी योजनाओं का डिजिटलीकरण, पेयजल आपूर्ति में सुधार, रोड और हाईवेज़ का बम्पर निर्माण, उज्ज्वला योजना, फसल बीमा योजना, जनधन योजना, न्यूनतम समर्थित मूल्य में बढ़ोतरी, 625 करोड़ से राज्यभर के 125 महत्वपूर्ण मन्दिरों का पुनरूत्थान, नहर योजना, चिकित्सा व्यवस्था में सुधार जैसे अनेक विकास कार्यों के कारण राजस्थान में जनता एक बार फिर से भाजपा से नाराज होते हुए भी समर्थक दिखी।

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जयपुर में द्रव्यवती नदी का उद्घाटन करतीं वसुंधरा राजे

यह हैं वो महत्वपूर्ण कारण जिनसे जो भाजपा एक महीने पहले बैकफुट पर समझी जा रही थी। वह एंटी इनकंबेंसी के बावजूद अब कांग्रेस से काफी आगे नजर आ रही है। और ये जमीनी हकीकत मीडिया के एग्जिट पोल्स को गलत साबित करने वाला है| 

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