सावधान! आपके बेटों को मानसिक रूप से नपुंसक बनाने का हो रहा है प्रयास

बेटों

मैरी कॉम ने अपने बेटों को चिट्ठी लिखी है, कुछ नया ड्रामा आरम्भ हुआ है लेट्स टॉक अबाउट रेप के नाम से। हाँ तो मैरी कॉम ने अपने 9 और 5 साल के बेटों को बाकायदा चिट्ठी लिख कर रेप के बारे में बताया है। यह क्यों ज़रूरी था ? क्योंकि यह एक समाचार पत्र द्वारा शुरू किया गया है जिसका एजेंडा ही भारत विरोधी है। इनको पढ़िए तो आपको लगेगा कि भारत की गली-गली में रेप हो रहा है। इस तरह के एजेंडे में सबको शामिल कर लिया जाता है लेखक, पत्रकार, खिलाडी इत्यादि जिससे कि हर एक व्यक्ति को भरोसा हो जाये कि हाँ ऐसा तो हो ही रहा है। एक बार यह यह रेप वाली बात में दिमाग में भर दी जाए तो ना दूसरे देशों के हालात के बारे में पता करता है आदमी,ना ही कभी आँकड़े देखता है। 

री कॉम ने अपने तीन मासूम बेटों को बताया कि रेप क्या है और कैसे उनकी माँ का शोषण हुआ था। वैसे यह हर बेटे वाली माँ से कहा जाता है, बेटे को रेस्पेक्ट वुमन सिखाओ। वो बड़ा होकर बलात्कारी ना बन जाए। कभी बेटी वालियों को नहीं कहा जाता कि लड़कों का शोषण मत करना क्योंकि मान लिया गया है कि लड़कियां मासूम होती हैं। और साथ में यह भी मान लिया गया है कि लड़का है तो बड़ा होकर शोषण करेगा ही। मुझसे तो यह तक कह दिया गया कि तुम तो क्या महिलाओं की इज़्ज़त करना सिखाओगी अपने बेटे को, तुम खुद ही इज़्ज़त नहीं करती। मेरा जवाब है क्यों करे मेरा बेटा किसी महिला की इज़्ज़त जब तक वो ऐसा कुछ काम नहीं करती और सिर्फ महिला की ही इज़्ज़त होती है क्या ? 

फ़ेमिनिस्ट मायें अपने बेटों को इतना मानसिक रूप से नपुंसक बना रही हैं कि महिला के एक आरोप पर वो आत्महत्या तक कर बैठते हैं। ऐसा नहीं होता तो आदमी की आत्महत्या का ग्राफ इतना ऊपर नहीं होता। आपको आश्चर्य होता है कभी कि लड़के अब वैसे दिलेर और बहादुर क्यों नहीं रहे ? क्योंकि मस्क्युलिनिटी इस अ मिथ जैसे कार्यक्रमों द्वारा उनको धीमा ज़हर दिया जा रहा है। अजीब से मउगा (महिला सरीखे, अंग्रेजी में मेंजिना ) किस्म के लड़के आपको आस- पास दिख जायेंगे। 

मैरी कॉम को पता नहीं है कि उनके बेटे आने वाले समय में कितने संकट में हैं। जब तक उनको पता चलेगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। किसी ज़माने में शत पुत्रवती भव एक आशीर्वाद था,आज वो अभिशाप बन चुका है। बेटी को बढ़ाने के चक्कर में बेटों को किनारे लगा दिया गया है।

 – ज्योति तिवारी, पुरुष अधिकार कार्यकर्ता, लेखिका व सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य करती हैं. उनकी किताब ‘अनुराग‘ बेस्ट सेलर पुस्तक रही है.

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