1981 का ऐतिहासिक मेलबर्न टेस्ट

मेलबर्न टेस्ट

“Miracle in Melbourne – When Lion hearted effort from Kapil Dev marshalled India to victory at the MCG.” मेलबर्न टेस्ट

1981 मेलबर्न टेस्ट…. भारत की टीम पहले बैटिंग कर रही थी, गुंडप्पा रंगनाथ विश्वनाथ के अलावा कोई भी बल्लेबाज टिक नहीं पाया था। विश्वनाथ ने शतक बनाया और स्कोर 237 तक पहुंचा। ऑस्ट्रेलिया ने ऐलन बॉर्डर के शतक, ग्रेग चैपल और डग वाल्टर्स की बदौलत 419 बनाकर 182 रनों की लीड ले ली थी। इतनी बड़ी लीड खाने के बाद भारत की जीत की उम्मीद कोई नहीं कर रहा था। बस एक बात सोची जा सकती थी कि जब जब GR विश्वनाथ शतक बनाते हैं, भारत या तो मैच जीतता है या ड्रॉ कराता है। दूसरी पारी में सुनील गावस्कर और चेतन चौहान बैटिंग के लिए उतरे, 165 की साझेदारी हुई पहले विकेट के लिए, थोड़ी उम्मीदें बंधीं लेकिन फिर गावस्कर एक गलत अंपायरिंग डिसीजन का शिकार हुए और टीम लड़खड़ा गयी। 324 पर ऑल आउट। ऑस्ट्रेलिया को चौथी पारी में 143 का लक्ष्य।

ये बड़ा ही आसान था ऑस्ट्रेलिया के लिए.. एक तो लक्ष्य छोटा… ऊपर से भारत के तीन गेंदबाज चोटिल…. शिवलाल यादव की पैर की उंगली में फ्रैक्चर हो गया था। उन्होंने पहली पारी में 32 ओवर फेंके थे। बाएँ हाथ के स्पिनर दिलीप दोषी को भी इंजरी थी और दिलीप दोषी ने 52 ओवर फेंके थे पहली पारी में। मेलबर्न टेस्ट

सबसे बुरी बात ये हुई थी कि कपिल देव की जांघ की नस खिंच गई थी और उन्होंने रनर लेकर बैटिंग की थी दूसरी पारी में। चौथे दिन चायकाल के बाद एक घण्टे का खेल बाकी था। भारतीय टीम मात्र 2 गेंदबाजों के साथ मैदान पर उतरी। एक बाएँ हाथ के सीमर करसन घावरी और दूसरे बाएँ हाथ के स्पिनर दिलीप दोषी। शिवलाल यादव बाहर हो चुके थे मैच से, कपिल देव शाम को गेंदबाजी करने की हालत में नहीं थे। ऑस्ट्रेलिया की रन चेज आरम्भ हुई । करसन घावरी ने जल्दी से ओपनर जॉन डेविसन को निपटाया और अगली गेंद पर ग्रेग चैपल को बोल्ड कर दिया। चौथे दिन शाम तक ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था 24 पर 3। लेकिन अभी भी वो फेवरेट्स थे मैच जीतने के लिए, क्योंकि भारत के पास केवल दो ही गेंदबाज बचे थे। 

पाँचवें दिन की सुबह, कपिल देव पेन किलर इंजेक्शन लेकर मैदान में उतर गए। सभी आश्चर्य में थे। कपिल ने गेंदबाजी शुरू की, एक के बाद एक ब्रूस यार्डली, ऐलन बॉर्डर, रॉडनी मार्श निपटने लगे। 55 पर छठे विकेट के रूप में जब पहली पारी में शतक बनाने वाले ऐलन बॉर्डर कपिल की गेंद पर बाहरी किनारा लगवा के किरमानी को कैच दे बैठे तो लगना शुरू हुआ कि अब ये टेस्ट जीता जा सकता है। 61 के स्कोर पर विकेटकीपर रॉडनी मार्श सातवें विकेट के रूप में आउट हुए। यहाँ से लगभग तय हो गया था कि ये मैच अब भारतीय टीम ही जीतने वाली है। इसके बाद जल्दी जल्दी डेनिस लिली और लेनी पास्को आउट हुए।

ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 83 पर 9… कपिल देव की गेंद जिम हिग्स के पैड पर लगी, जोरदार अपील और आउट। भारतीय टीम ने 59 रनों से विजय प्राप्त कर ली थी…. ये विजय आज भी भारत की सबसे यादगार टेस्ट विजयों में गिनी जाती है। कपिल देव ने चोटिल होने के बावजूद पांचवें दिन एक छोर से नॉन स्टॉप 17 ओवर फेंक दिए और 28 रन देकर 5 विकेट ले लिए। आप स्पिनर से आशा कर सकते हैं कि वो इतने ओवर फेंक दे लगातार… लेकिन फिट होने के बाद भी तेज गेंदबाज एक स्पेल में 7-8 ओवर से ज्यादा नहीं फेंकते, तेज गेंदबाजी क्रिकेट में सबसे ज्यादा मेहनत का काम है। जो खिलाड़ी एक दिन पहले विकेट के बीच दौड़ने के लिए भी फिट नहीं था और रनर के सहारे बैटिंग कर रहा था। वो अगले दिन नॉन स्टॉप 17 ओवर फेंक दे और 5 विकेट ले जाए, ये काम कपिल देव ही कर सकते थे।

आज कपिल पाजी का बड्डे है… पाजी ने भारत की एक पूरी जेनरेशन को तेज गेंदबाजी की ओर आकर्षित किया। Match winner with the bat, match winner with the ball. 5248 Test runs, 8 Test Centuries. 434 Test Wickets. Happy Birthday to the greatest cricketer India has ever produced.

(1983 वर्ल्ड कप की कहानियाँ तो सबको पता हैं पर इस ऐतिहासिक मेलबर्न टेस्ट के बारे में बहुत कम ही खबरें चलती हैं। GR विश्वनाथ इस मैच के मैन ऑफ द मैच थे लेकिन ये मैच कपिल देव के लिए याद रखा जाता है। )

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