राइट विंग और लेफ्ट दोनों नारीवाद के मामले में एक हैं।

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नारीवाद

कल काफी भारी मतों से बेज्जती हुई, इसलिए आज युगपुरुष से मुलाकात का राज खोला जाएगा। बात संभवतः 2012-13 की रही होगी। 498a में नई नई जमानत हुई थी, तो फेमिनिज्म नारीवाद का नया अर्थ समझ आ गया था। मेंस राइट मूवमेंट में योगदान देने का सोचा। मैं उन लोगों में से हूं ,जो शिकायत कर के रोते नहीं बल्कि काम करते हैं। लड़कों पर आईआरबीएम( irretrievable breakdown of marriage) नाम का नया बम फूटने वाला था। सोचा आज आवाज़ नहीं उठाई तो आज भाई के केस में जमानत ली है,कल बेटे के केस में ज़मीन जायदाद से हाथ धो बैठेंगे। हिंदू विवाह संशोधन बिल आ गया था, इसमें प्रावधान था कि तलाक़ के लिए कोई वजह होना ज़रूरी नहीं है और तलाक़ के समय लड़के की संपत्ति inherited और inheritable दोनों में लड़की को आधा हिस्सा मिलेगा। यानी ना केवल लड़के की संपत्ति बल्कि उसके बाप दादाओं की संपत्ति भी तलाक के समय पत्नी को दे दी जाती। इससे कोई मतलब नहीं कि पत्नी ने कुछ योगदान दिया भी कि नहीं।  बाद में इसमें बात चीत कर के और एक चीज़ जोड़ी गयी कि कितनी संपत्ति देनी है यह जज के ऊपर छोड़ दो। समझ सकते हैं आप की कितना बड़ा स्कैम होने जा रहा था। यह कृपा केवल हिन्दुओं और सिखों पर थी, मनमोहन मूक सिंह की सरकार थी। नारीवाद

दो बार पार्लियामेंट जाने का मौका भी मिला और पार्लियामेंट के अंदर फोन नहीं ले जाने देते तो कोई फोटो नहीं है। एक मौका भाजपा के श्री हंसराज गंगाराम अहीर जी ने दिया था क्योंकि उनको यह बिल सही नहीं लग रहा था। मुझे वो सबसे ज्यादा सुलझे हुए व्यक्ति लगे। एक ग्रुप बनाया गया था जिसका काम था, इस नए बिल के लिए जागरुकता फैलाना और नेताओं को समझाना कि कैसे यह बहुत घातक है। MP के घर-घर जाने वाले ग्रुप को मैंने लीड किया था। मैंने दिल्ली के साउथ और नॉर्थ ब्लॉक के चक्कर बहुत काटे हैं। किसी ने पैसे से योगदान दिया,किसी ने सोशल मीडिया हैंडल कर के। पैसे से सामग्री छपवाई गयी, और उसको बैग में लेकर मेट्रो के धक्के खाते हुए मंत्री MP जो मिल जाये उससे मिलना होता था. उस समय हम सभी टॉप लीडर्स से मिले, किसी ने कहा केजरीवाल उभरता लीडर है उससे भी मिलो तो चले गए। सुषमा स्वराज जी से दो बार मिले, गोपीनाथ मुंडे, राजनाथ सिंह, नजमा हेपतुल्लाह, सुमित्रा महाजन, प्रकाश जावड़ेकर मुलायम सिंह यादव और भी ना जाने कौन कौन। हां फोटो केवल युगपुरुष के साथ है, कुछ फोटो सुषमा जी के साथ थीं वो जाने कहां हैं। बल्कि आम आदमी पार्टी के संजय सिंह एक धरना में आए भी थे। ( पुरानी आयी डी उड़ने से सब मटेरियल उड़ गया) वो धरना Forgotten women of India नाम से हुआ था, इसमें लड़कों की माएं और बहनों को बुलाया गया था।   फिर वो बिल राज्य सभा से पास हो गया, जावड़ेकर जी कुछ बोल ही नहीं पाए हां नजमा जी ने ज़रूर कोशिश की थी। नजमा जी से जब मिले तो उन्होंने कहा,”अरे आप लोग पहले क्यों नहीं आये मैंने तो खुद इसको पढ़ा और सोचा कि यह तो हद का बकवास बिल है। ” मुलायम सिंह यादव ने बड़ी चिंता से मुझसे कहा था, इसको हिंदी में लिख कर हमको दो, हम तो रेप और दहेज़ के कानून से ही परेशान हैं यह और मुसीबत आ रही है.” बाद में मुलायम सिंह को लडकों से गलती हो जाती है वाली लाइन मीडिया में चलाकर शांत करवा दिया गया, पूरा भाषण किसी ने सुना ही नहीं। एक MP ने कहा था,”महिलाएं अक्सर समूह में आती हैं अपनी गाथा कहती हैं,आप पुरुषों को भी आना चाहिए। लोक सभा से भी बिल पास हो जाता मगर तब तक सरकार गिर गई। दुख की बात यह है कि राइट विंग और लेफ्ट दोनों फेमिनिज्म नारीवाद के मामले में एक हैं। नारीवाद

गोपीनाथ मुंडे और सुषमा स्वराज से मिलकर बहुत निराशा हुई थी। हम लोग रोज़ आरएसएस के देश भर के ऑफिसो में फोन मिलाया करते थे  कि क्या यही हिंदू हित है। फिर आई मोदी सरकार और सब बदल गया, एनजीओ के पैसों पर रोक लग गई और फेमिनिस्टों ने चूड़ियां तोड़ दी। वहां पश्चिम में ट्रम्प और पुतिन ने इनकी कमर तोड़ थी और भारत में मोदी जी ने .जो रंजना कुमारी, फ्लाविया अगनेस, कृष्णा तीरथ आदि बहुत ज़्यादा बवाल काटती थीं, आज चुप रहती हैं। बाकी 498a में कोई सुधार नहीं है और होना मुश्किल भी है क्योंकि लोगों को लगता है दहेज समस्या इससे हल हो जाएगी। मेरे मरने तक अगर यह bailable भी हो जाए तो बहुत बड़ी बात होगी। आइआरबीएम आज ठंडे बस्ते में है, मगर है अभी भी आप लोक सभा की लिस्ट में देख सकते हैं। हिन्दू विवाह अधिनियम में बदलाव तो होना चाहिए मगर ऐसे नहीं. एक मजेदार किस्सा है जब UPA की ससरकार गिरी तब भी हम लोग नार्थ ब्लाक के चक्कर काट रहे थे, ट्विटर देखा तो पता चला. खैर हमको लगा कि,जो काम करने आये हैं वो कर के जायेंगे हर दिन 12 MP का टारगेट था।  एक मध्य प्रदेश के कांग्रेसी MP का घर मिला, उन्होंने खुद दरवाज़ा खोला। सब सुना और कहा,”गलत नीतियाँ आलाकमान की और भुगते हम लोग जबकि मैंने अपने क्षेत्र के लिए बहुत काम किया है,आप युवा लोग आये बड़ा अच्छा लगा वरना हम कांग्रेसियों के यहाँ कुत्ता भी नहीं आता। ” वहां तो चुप रहे हम नीचे आकर पागलों की तरह हँसे। नारीवाद

मैं मूवमेंट से दूर हूं क्योंकि मेरा काम ख़तम हो चुका है, मैंने अपना योगदान दे दिया। वैसे भी जहां क्रेडिट लेने की लड़ाई शुरू हो जाए वहां से निकल लेना चाहिए। फिर भी मैं लिखती रहूंगी, मेरे पास काफी कुछ है लोगों को बताने के लिए। नारीवाद

 – ज्योति तिवारी, पुरुष अधिकार कार्यकर्ता, लेखिका व सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य करती हैं. उनकी किताब ‘अनुराग‘ बेस्ट सेलर पुस्तक रही है.

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