क्या कपिल मिश्रा की एक कविता से डर गए आतंकियों के पैरोकार?

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कपिल मिश्रा

पुलवामा हमले के बाद चालीस से अधिक जवानों के बलिदान के बाद हर देशवासी गमजदा है, पर इस मौके पर भी भारत में बैठे कुछ पाकिस्तान समर्थक गंदी राजनीती से बाज नहीं आ रहे हैं| बार बार देशद्रोह के काम कर चुका ये टुकड़े टुकड़े गैंग कभी सेना को बलात्कारी बता रहा है, कभी कश्मीरी पत्थरबाजों को मासूम बता रहा है, कभी पाकिस्तान को निर्दोष बता रहा है, तो कोई कश्मीर को आजाद करने की बात कर रहा है|

इसलिए घर में बैठकर दुश्मनों का साथ देने वाले टुकड़े टुकड़े गैंग से क्षुब्ध होकर दिल्ली से विधायक कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर एक कविता रिकॉर्ड करके ट्वीट की| केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कपिल मिश्रा की रोंगटे खड़ी कर देने वाली कविता को शेयर किया..

इस कविता में जैसा आप स्पष्ट देख सकते हैं केवल आतंकियों के पैरोकारों का ही कपिल मिश्रा ने विरोध किया है, और सारी टुकड़े टुकड़े जमात ने उनपर सम्मिलित हमला कर दिया| आश्चर्य इस बात का है कि कपिल मिश्रा ने सिर्फ देशद्रोहियों को सबक सिखाने की बात कही है, उससे इन लोगों को इतनी क्या दिक्कत हो रही है? क्या उन्होंने खुद को देशद्रोही स्वीकार कर लिया है कि वे वीडियो को अपने ऊपर लेकर देख रहे हैं? यही वो लोग हैं जो गद्दारों को सबक सिखाने की एक कविता की पंक्ति पर इतना शोर मचा रहे हैं, जबकि ये लोग आतंकियों के लिए लगातार लड़ते रहे हैं| आइये देखें कौन हैं ये लोग

कपिल मिश्रा ने वीडियो में शहीदों की जाति गिनने वालों को बेनकाब किया है, दरअसल वे
वामपंथी ‘कारवां’ पत्रिका की बात कर रहे हैं जिसमें एक लेख में पुलवामा के शहीदों की जातियों को बताया गया था, और समाज में जातिगत दुर्भाव फैलाने की कोशिश की गई थी| इस मैगजीन पर अग्निवीर सन्गठन द्वारा केस भी दर्ज किया गया था| बामसेफ के नेता वामन मेश्राम द्वारा भी पुलवामा हमले पर पाकिस्तान का पक्ष लिया था और पाकिस्तान को क्लीनचिट थी, जिसे पाकिस्तानियों द्वारा खूब शेयर किया गया, देखिए पाकिस्तानी हैंडल का ट्वीट

ऐसे ही पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव के केस में, पाकिस्तानी काउंसिलर ने भारतीय पत्रकार चन्दन नंदी, करण थापर, और प्रवीण स्वामी की मीडिया में छपी रिपोर्ट का हवाला देकर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश की थी, जिसमें बताया गया था कि कुलभूषण जाधव रॉ एजेंट थे और पाकिस्तान में जासूसी करते थे| भारत में बैठे टुकड़े टुकड़े गैंग के ये सदस्य लगातार पाकिस्तानियों की छद्म रूप से सहायता में संलिप्त रहे हैं|

भारत में ऐसे लोग बैठे हैं जो सेना पर पत्थर फेंकने वाले पत्थरबाजों को निर्दोष बताते हैं| ऐसी ही गुवाहाटी की यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर पपड़ी बनर्जी ने फेसबुक पोस्ट लिखकर भारतीय सेना को बच्चों का हत्यारा और बलात्कारी बताया था और कहा था कि सेना इसी पाप को भुगत रही है| इस आपत्तिजनक पोस्ट पर कॉलेज द्वारा प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया था| कपिल ने अपने वीडियो में इन लोगों की निंदा की थी| इसी तरह बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भारत को असुरक्षित बताया था| दक्षिणी अभिनेता कमल हासन ने तो पुलवामा आतंकी हमले के बाद कश्मीर में जनमत संग्रह की बात कह डाली थी| ऐसे ही जेएनयू की नेता शेहला रशीद जो छद्म रूप से जेएनयू में भारत के टुकड़े टुकड़े के नारे लगाने वालों कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य जैसों के लगातार साथ रही हैं और समय समय पर भारतीय सेना पर झूठे इल्जाम लगाती रही हैं| इसके साथ ही पुलवामा हमले के बाद अल्पसंख्यकों को उकसाने की कोशिश भी इन्होने की थी| इन सबका विरोध कपिल ने वीडिओ में किया था|

पुलवामा हमले के बाद सिद्धू ने पाकिस्तान को क्लीनचिट देते हुए कहा था कि आतंकवाद का कोई देश नहीं होता, इससे पहले सिद्धू पाकिस्तानी आर्मी चीफ बाजवा के गले मिलकर आए थे| प्रशांत भूषण ने आतंकी याकूब मेमन की फांसी को टालने के लिए आधी रात को चीफ जस्टिस के घर जाकर सुनवाई की अपील की थी| तब रात में ढाई बजे कोर्ट खुला था| वहीं प्रशांत भूषण अफजल गुरु की फांसी रुकवाने के लिए भी लड़ते रहे थे| कश्मीर में भी इन्होने जनमत संग्रह की बात की थी|इनकी इन देशविरोधी हरकतों के बाद लगातार इनका विरोध होता रहा है| कपिल मिश्र द्वारा इनका विरोध होने पर प्रशांत भूषण, शेहला रशीद, कविता कृष्णन, प्रेरणा बख्शी जैसे अर्बन नक्स्ल्स और देशविरोधी कार्यों में छद्म रूप से संलिप्त रहने वाले तमाम वामपंथी कपिल मिश्रा के पीछे पड़ गए हैं| पर कपिल मिश्रा की भावनाएं केवल उनकी नहीं बल्कि करोड़ों भारतियों की भावनाएं हैं, जिसे टुकड़े टुकड़े गैंग दबा नहीं पाएगा|

देखिए कविता कृष्णन का ट्वीट, कैसे देशद्रोहियों को सबक सिखाने की बात उन्हें हजम नहीं हो रही है और घटिया स्तर की भाषा पर उतर आई हैं.

क्या आज कविता को लिंचिंग की शक्ल देकर झूठ फैलाने वाले भूल गये कि 31 मई 2017 को कपिल मिश्रा को दिल्ली विधान सभा में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने मारापीटा था और फिर मार्शलों की सहायता से बाहर फेंक दिया गया था| सिसोदिया ने इसके लिए इशारा किया था और केजरीवाल मुस्कराते हुए पाए गए| तब इस टुकड़े टुकड़े गैंग की सहानुभूति कहाँ गई थी? शहरी नक्सलियों से इससे बेहतर की उम्मीद हमने की भी नहीं थी| कंक्रीट के जंगल में हैं तो हाथ पैर चला कर काम चला दिया, बस्तर के जंगल में तो गोली बारूद से ही बात करते हैं| इसके अलावा 21 दिसम्बर 2018 को भी कपिल मिश्रा के साथ आप के विधायकों ने मारपीट की थी| पर जिन्हें कश्मीर के बुरहान वानी जैसे जिहादी आतंकियों में टैलेंटेड युवक दीखता है, पत्थरबाजों में जिन्हें मासूमियत नजर आती है, सेना में जिन्हें हैवान नजर आता है, उन पाकिस्तान प्रेमियों को कपिल मिश्रा से की गई मारपीट क्यों दिखेगी?

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