शतभिषा नक्षत्र के स्वामी वरुण देव के मन्त्र

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varuna वरुण देव जल के देवता शतभिषा नक्षत्र shatbhisha nakshatra वरुणदेव

चन्द्रप्रभं पंकजसन्निषण्णं
पाशांकुशाभीतिवरं दधानम्।
मुक्ताविभूषांचितसर्वगात्रं
ध्यायेत् प्रसन्नं वरुणं विभूत्यै।

जिनके शरीर की कांति चंद्रमा के समान है, जो पंकज पर आसीन हैं, जो अपने हाथों में पाश, अंकुश, अभय तथा वरमुद्रा धारण किए हुए हैं। जिनका समस्त शरीर मोतियों के आभूषणों से भूषित है ऐसे प्रसन्नमुख श्री वरुण देव का ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए ध्यान करना चाहिए।

varuna वरुण देव जल के देवता शतभिषा नक्षत्र shatbhisha nakshatra वरुणदेव

अच्छांशुकाभरणमाल्यविलेपनाढ्यः
पाशांकुशाभयवरोद्यतदोःसरोज।
स्वच्छारविन्दवसतिः सुसितः प्रसन्नो
भूयाद्विभूतिविधये वरुणश्चिरं वः।

श्वेत वर्ण के वस्त्राभूषणों से सुशोभित, हाथ में पाश, अंकुश, अभय एवं वरमुद्राधारी, श्वेतवर्ण के कमल पर विराजमान, गौरवर्णी, प्रसन्नवदन भगवान् वरुण का मैं ध्यान करता हूँ।

ऋग्वेदीय वरुण सूक्त १

varuna शतभिषा नक्षत्र shatbhisha nakshatra

प्रणमामि सदा देवमादित्यमुदकेशयम्।
स्निग्धवैदूर्यसङ्काशं वरुणं सुमहाद्युतिम् ॥
एहि देव जलाध्यक्ष यादोगणमहेश्वर ।
नागदैत्योरगगणैस्सततं सेवितान्युत॥
– विष्णुधर्मोत्तरपुराण

चिकनी वैदूर्यमणि की प्रभा वाले दीप्तिमान् वरुण देव को सदा प्रणाम करता हूँ जो आदित्यरूप हैं और जल में शयन करते हैं। नागों, दैत्यों और सर्पगणों से सदा सेवित वे वरुण देव जलाध्यक्ष हैं और समुद्र के राक्षसों व महेश्वर के भी ईश्वर हैं।

ऋग्वेदीय वरुण सूक्त २

varuna वरुण देव जल के देवता शतभिषा नक्षत्र shatbhisha nakshatra वरुणदेव

वरुणो धवलो जिष्णुः पुरुषो निम्नगाधिपः।
पाशहस्तो महाबाहुस्तस्मै नित्यं नमो नमः॥

धवल वर्ण वाले, नदियों के स्वामी, विजयी पुरुष वरुण देव, जो हाथ में पाश धारण करते हैं और महाबाहु हैं, उनको मैं नित्य नमन करता हूँ।

नमो नमस्ते स्फटिक प्रभाय
सुश्वेतहाराय सुमंगलाय ।
सुपाशहस्ताय झषासनाय
जलाधिनाथाय नमो नमस्ते ॥

नमन करता हूँ स्फटिक की प्रभा वाले, मोतियों का सुंदर श्वेत हार पहने हुए, सुमङ्गल वरुण देव को। हाथ में पाश धारण किए हुए, मछली के आसन पर विराजित, जल के अधिपति भगवान् वरुण देव को नमन करता हूँ।

varuna वरुणदेव जल के देवता शतभिषा नक्षत्र shatbhisha nakshatra वरुण

वरुणं सततं वंदे सुधाकलश धारीणम् l
पाशहस्तं शतभिशग् देवतां देववंदितम् ll

मैं उन वरुण देवता को सदा नमस्कार करता हूँ जो अमृतकलश धारण करते हैं, जिनके हाथ में पाश है, जो शतभिषा नक्षत्र के देवता हैं और देवताओं द्वारा नित्य वन्दित हैं।

ॐ अपां पतये वरुणाय नमः ।

शतभिषा नक्षत्र के अधिपति भगवान् वरुण देव हैं। शतभिषा नक्षत्र के दिन परमपुरुष श्रीमन्नारायण के कपोलों का पूजन करना चाहिए।

उपरोक्त लेख आदरणीय लेखक की निजी अभिव्यक्ति है एवं लेख में दिए गए विचारों, तथ्यों एवं उनके स्त्रोत की प्रामाणिकता सिद्ध करने हेतु The Analyst उत्तरदायी नहीं है।

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